प्रधानमंत्री नरेंद्र को नोटबंदी पर जिस नतीजे का इंतजार पिछले दो महीने से था वह आ गया. और यह नतीजा खुश करने वाला है. उत्तर प्रदेश चुनाव अपने आखिरी दौर में है, सबसे ज्यादा सीटों वाले पूर्वांचल के मतदाता राजनीतिक दलों की किस्मत तय करने वाले हैं. इस अहम मोड़ पर प्रधानमंत्री को एक नया हथियार मिला है.

आठ नवंबर की रात प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का ऐलान किया और उसके कुछ ही घंटों के बाद देश में पांच सौ और हजार के नोट चलने बंद हो गए थे. 30 दिसंबर तक बैंक और एटीएम के सामने लंबी लाइनें दिखीं और नोटबंदी के इस फैसले पर जबरदस्त बहस हुई. प्रधानमंत्री के इस फैसले का सबसे ज्यादा विरोध राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने किया. उत्तर प्रदेश के चुनाव में ये दोनों नेता प्रधानमंत्री के सामने हैं और दोनों ने नोटबंदी को सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा भी बनाया है. ये लोग नोटबंदी से गरीबों को हुई परेशानी और अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान का मुद्दा उठा रहे हैं. इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नोटबंदी को मोन्युमेंटल डिजास्टर यानी विशाल त्रासदी और कानूनी लूट की संज्ञा दे चुके हैं.

लेकिन इसी बीच केंद्रीय सांख्यिकी संगठन की रिपोर्ट प्रधानमंत्री के लिए अच्छी खबर लेकर आई है - नोटबंदी के दौरान भी भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में नंबर एक पर रही. अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही के बीच भारत का सकल घरेलू उत्पाद सात फीसदी की रफ्तार से बढ़ा जबकि चीन की अर्थव्यवस्था इस दौरान 6.8 फीसदी की रफ्तार ही पकड़ पाई. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले भाजपा के एक नेता बताते हैं कि ‘अब तक यह समझाना मुश्किल हो रहा था कि नोटबंदी से देश का फायदा हुआ. अब जनता और कार्यकर्ता को जवाब देने के लिए कुछ तो होगा.’

भारत सरकार का सांख्यिकी विभाग हर तिमाही ऐसी रिपोर्ट तैयार करता है. चूंकि ये आंकड़े भाजपा के नहीं है इसलिए इन पर विरोधी दलों के लिए भी सवाल उठाना आसान नहीं होगा. सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब इन नए आंकड़ों का सहारा लेकर राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर हमला तेज़ करने वाले हैं. वे जनता को बताने वाले हैं कि नोटबंदी के दौरान खेती और किसानों को भी उतना नुकसान नहीं हुआ जितने नुकसान की बात कही जा रही है.

केंद्रीय सांख्यिकी संस्था के आंकड़ों के मुताबिक नोटबंदी का असर खेती पर नहीं पड़ा, उल्टे कृषि क्षेत्र में जबरदस्त बढ़ोतरी की उम्मीद है. 2016-17 में खेती की अनुमानित विकास दर बीते साल के 0.8% से बढ़कर 4.4% हो गई है. आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास का कहना है कि ‘कुछ लोग नोटबंदी के नकारात्मक असर को बढ़ा-चढ़ाकर बता रहे थे. ये संतोष की बात है कि ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ.’ हालांकि विपक्षी नेताओं की एक बात में दम है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट आई है. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 10.6% की विकास दर इस साल 7.7% ही रहने का अनुमान है.

नोटबंदी का फायदा गिनाने के सबूत भले ही न मिले हों लेकिन इस बात के लिखित प्रमाण अब सरकार के पास हैं कि नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था को हानि नहीं पहुंची. राहुल गांधी, अखिलेश यादव, डिंपल यादव, मनमोहन सिंह और ममता बनर्जी के आरोपों का जवाब देने के लिए भाजपा के पास अब हवा-हवाई बातों से बढ़कर कुछ तथ्य और तर्क हाथ लगे हैं. अब वे शायद यही सोच रहे होंगे कि इन आंकड़ों ने आते-आते कहीं देर तो नहीं कर दी है. क्योंकि उत्तर प्रदेश के बचे दो चरणों में अब सिर्फ 89 सीटों पर ही चुनाव होना बाकी है.