इस साल इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) शुरू होने में करीब एक महीने का समय बाकी है. लेकिन, यह अभी से चर्चा में है. इसकी प्रमुख वजह हाल ही में बेंगलुरू में आयोजित हुई खिलाड़ियों की नीलामी है. यह नीलामी दो वजहों से काफी चर्चा में रही. पहली वजह, कई नामी भारतीय क्रिकेटरों को किसी भी टीम ने नहीं खरीदा. दूसरी वजह यह रही कि कई गुमनाम खिलाड़ियों की बोली करोड़ों में लगी.

इन गुमनाम खिलाड़ियों में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम थंगारासु नटराजन का भी है जिन्हें किंग्स इलेविन पंजाब ने तीन करोड़ रुपए में खरीदा है. इतनी बड़ी बोली लगना खुद नटराजन के लिए भी काफी चौंकाने वाला है. एक समाचार पत्र से बातचीत में वे कहते हैं कि उनका मकसद किसी तरह से आईपीएल में पहुंचना था और इसीलिए उन्होंने अपना बेस प्राइस सबसे कम केवल 10 लाख रुपए ही रखा था. नीलामी के दौरान केवल पंजाब ही नहीं बल्कि पुणे, कोलकाता, हैदराबाद ने भी नटराजन को खरीदने के लिए अपना पूरा जोर लगा दिया था लेकिन अंत में पंजाब ने बेस प्राइस से 30 गुना ज्यादा रकम में नटराजन को खरीद लिया.

नटराजन को इतनी बड़ी रकम में खरीदे जाने से भले ही कई लोग हैरान हों. लेकिन, उनके अब तक के क्रिकेट करियर को करीब से देखने पर पता चलता है कि किंग्स इलेविन पंजाब ने तीन करोड़ में उन्हें खरीद कर कोई गलती नहीं की है. सलेम शहर से 36 किमी दूर एक छोटे से गांव के रहने वाले नटराजन का आईपीएल में चुने जाने तक का सफर काफी चुनौतियों से भरा रहा है. आइये जानते हैं कि 25 वर्षीय नटराजन में आखिर ऐसा क्या है कि आईपीएल की चार टीमों ने उन्हें खरीदने के लिए अपना पूरा जोर लगा दिया.

टेनिस की गेंद से क्रिकेट की शुरूआत

नटराजन ने अपने छोटे से कस्बे में टेनिस की गेंद से क्रिकेट खेलने की शुरुआत की थी. हालांकि, तब उन्हें यह बिलकुल नहीं पता था कि वे इस खेल को अपना करियर भी बना सकते हैं. ऐसा सोचने का एक कारण उनकी गरीबी भी थी. उनके पिता साड़ी की एक फैक्ट्री में दिहाड़ी मजदूर हैं जबकि उनकी मां सड़क किनारे चाय और खाने का एक स्टाल चलाती हैं. साल 2011-12 तक नटराजन भी मां के काम में उनकी मदद किया करते थे. नटराजन कहते हैं कि 20 साल की उम्र तक उन्होंने एक क्रिकेट स्टेडियम भी नहीं देखा था. तब तक वे टेनिस की गेंद से ही क्रिकेट खेला करते थे.

एक कस्बे से चेन्नई तक पहुंचने की कहानी

नटराजन की अपने कस्बे चिन्नापम्पट्टी से निकल कर चेन्नई के एक क्लब तक पहुंचने की कहानी भी काफी दिलचस्प है. दरअसल, शौकिया तौर पर क्रिकेट खेलने वाले नटराजन की तेज गेंदबाजी के चर्चे उनके कस्बे में काफी हुआ करते थे. वे अपने कस्बे में ही कई टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया करते थे जिससे उन्हें पुरस्कार के रूप में कुछ पैसा भी मिल जाता था. इसी दौरान उनके ही कस्बे के और चेन्नई में रहने वाले ए जयप्रकाश की उन पर नजर पड़ी और फिर वही उन्हें चेन्नई तक लेकर गए. एक अखबार को जयप्रकाश बताते हैं कि उनका खुद का सपना एक बड़ा क्रिकेटर बनना था लेकिन वे इसे पूरा नहीं कर सके. इसके बावजूद क्रिकेट को लेकर जयप्रकाश का लगाव कम नहीं हुआ. वे चिन्नापम्पट्टी में इसी नाम से और सलेम की जिला स्तर की क्रिकेट टीम के कप्तान हैं.

जयप्रकाश के मुताबिक नटराजन जब उनकी टीम में खेलने आया था तब उसकी उम्र 17 साल थी. लेकिन, उस समय भी वह टेनिस की गेंद से गजब की गेंदबाजी किया करता था. उस समय ही उसकी गेंद कोण बनाती हुई जाती थी जिसे खेलना आसान नहीं था. वे कहते हैं कि चिन्नापम्पट्टी की टीम से खेलने के बाद जब नटराजन ने जिला स्तर पर उनकी टीम ‘सलेम किंग्स’ से खेलना शुरू किया तो उन्हें अहसास हुआ कि यह युवा एक लंबी रेस का घोड़ा साबित होने के लायक है.

इसके बाद जयप्रकाश नटराजन को चेन्नई लेकर गए. वहां उन्होंने नटराजन को अपने मित्र कर्पुर जयप्रकाश से मिलवाया. कर्पुर जयप्रकाश तमिलनाडु क्रिकेट संघ के अंतर्गत आने वाली एक चतुर्थ श्रेणी लीग में दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल की टीम की ओर से खेला करते थे. जयप्रकाश बताते हैं कि कर्पुर भी नटराजन की गेंदबाजी को देखकर काफी प्रभावित हुए और उन्हें अपनी टीम की ओर से लीग में खेलने का मौका दिया. इस लीग में भी नटराजन का शानदार प्रदर्शन जारी रहा और उन्होंने अपने प्रदर्शन से कई बड़े क्रिकेट क्लबों का ध्यान अपनी ओर खींचा. यहीं से प्रथम श्रेणी स्तर के क्रिकेट क्लब विजय क्रिकेट क्लब की टीम में उनका चयन हुआ. जयप्रकाश के अनुसार विजय क्रिकेट क्लब में चुना जाना नटराजन के करियर में सबसे अहम मोड़ साबित हुआ. यहीं से वे राज्य स्तर पर चर्चा में भी आए साथ ही इस टीम में उन्हें राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ समय बिताने का मौका मिला. इससे उनकी गेंदबाजी में निखार आया और उनका अनुभव भी बढ़ा.

रणजी ट्रॉफी में चयन

नटराजन को विजय क्लब की ओर से शानदार प्रदर्शन करने का इनाम 2015 की शुरुआत में मिला जब तमिलनाडु की रणजी टीम में उनका चयन हुआ. जनवरी 2015 में उन्होंने कोलकाता के ईडन गार्डन में अपना पहला रणजी मैच बंगाल के खिलाफ खेला. इस मैच में उन्होंने तीन विकेट लिए थे. लेकिन, इस पहले ही मैच में ही ऐसा कुछ घटित हुआ जिसने उनके आगे के करियर पर विराम लगा दिया. इस मैच में उनके गेंदबाजी एक्शन को संदिग्ध बता दिया गया और उनके खेलने पर रोक लग गई. एक क्रिकेट वेबसाइट से बातचीत में नटराजन कहते हैं कि इस मैच के बाद जब उन्होंने 177 संदिग्ध एक्शन वाले गेंदबाजों की सूची में अपना नाम देखा तो उनके पांव तले जमीन खिसक गई थी. इस घटना के बाद वे करीब डेढ़ साल तक राष्ट्रीय और राज्य स्तर का क्रिकेट नहीं खेल पाए.

हालांकि, इस बुरे वक्त से उबरने में तमिलनाडु क्रिकेट संघ अकेडमी के अध्यक्ष और हेड कोच सुनील सुब्रमण्यन ने नटराजन की काफी मदद की. लंबे समय तक रविचंद्रन अश्विन के कोच रहे सुनील सुब्रमण्यन ने नटराजन का एक्शन सुधारने के लिए काफी मेहनत की. इस बुरे दौर में भी ए जयप्रकाश लगातार नटराजन के साथ बने रहे और उनका हौसला बढ़ाते रहे. जयप्रकाश बताते हैं कि इस डेढ़ साल में नटराजन ने जमकर पसीना बहाया. इससे वे न सिर्फ अपने गेंदबाजी एक्शन को बदलने में कामयाब हुए बल्कि इसी दौरान उन्होंने तेज गति से सटीक यॉर्कर फेंकने की कला भी विकसित कर ली. 2016 में एक्शन को लेकर बीसीसीआई से हरी झंडी मिलने के बाद नटराजन ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट में वापसी की. उन्होंने 2016-17 रणजी ट्रॉफी में तमिलनाडु की ओर से खेलते हुए आठ मैचों में 24 विकेट लिए इस दौरान उनकी लगातार यॉर्कर फेंकने की खूबी खासी चर्चा में रही.

टीएनपीएल से आईपीएल की राह

पहले विजय क्लब और फिर रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन से नटराजन ने राज्य स्तर पर अपनी पहचान बना ली. इसके बाद तमिलनाडु प्रीमियर लीग (टीएनपीएल) ने उनके अंतराष्ट्रीय क्रिकेट करियर की नींव रख दी. इस लीग में ‘डिंडीगुल ड्रैगन्स’ की ओर से खेलते हुए उन्होंने कई बार शानदार प्रदर्शन किया. अपनी सटीक यॉर्कर डालने की चर्चाओं के बीच उन्होंने ‘टुटी पैट्रियोट्स’ टीम के खिलाफ सुपर ओवर में लगातार छह गेंदे यॉर्कर डालकर आईपीएल फ्रेंचाइजीज का ध्यान अपनी ओर खींचा. सटीक यॉर्कर फेंकने की उनकी खूबी की वजह से ही उनकी तुलना डेथ ओवर में यॉर्कर स्पेशलिस्ट माने जाने वाले बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफ़िज़ूर रहमान से की जाने लगी है. तमिलनाडु में हर कोई उन्हें भारतीय मुस्तफ़िज़ूर रहमान कहकर बुलाता है.

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नटराजन पिछले तीन साल से चेन्नई के मशहूर चेमप्लास्ट क्लब के गेस्ट हाउस में रहकर गेंदबाजी की बारीकियां सीख रहे हैं. इस क्लब में क्रिकेट के मामलों के प्रमुख और पूर्व भारतीय विकेट कीपर भरत रेड्डी कहते हैं, ‘नटराजन के लिए आईपीएल में बड़ी बोली लगने को लेकर हर कोई हैरान है, लेकिन मैं हैरान नहीं हूं क्योंकि मैं पहले से जानता था कि नटराजन की बड़ी बोली लगेगी.’ वे आगे कहते हैं कि आज के दौर में रणजी से लेकर टीएनपीएल लीग हर किसी का टीवी पर लाइव प्रसारण होता है जिससे अब खिलाड़ी पूरी दुनिया की नजरों में आ जाते हैं. रेड्डी के मुताबिक तमिलनाडु प्रीमियर लीग खत्म होने के बाद से उनके पास आईपीएल फ्रेंचाइजियों के लगातार फोन आ रहे थे और वे सिर्फ थंगारासु नटराजन के बारे में ही जानना चाहते थे.