न्यूयॉर्क की वॉल स्ट्रीट में कल से नजारा कुछ बदला हुआ है. यहां मौजूद अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज का प्रतीक बन चुकी कलाकृति ‘चार्जिंग बुल’ यानी भड़के हुए सांड के सामने स्थापित की गई एक दूसरी कलाकृति हर आने-जाने वाले का ध्यान आकर्षित कर रही है. इसे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के एक दिन पहले लगाया गया है. इस कलाकृति का नाम है – ‘द फियरलैस गर्ल’. सांड के सामने तनकर खड़ी एक लड़की की यह कांस्य प्रतिमा एसेट मैनेजमेंट कंपनी (विभिन्न कॉर्पोरेट समूहों या व्यक्तियों की धन-संपदा का निवेश करने वाली फर्म) स्टेट स्ट्रीट ग्लोबल एडवाइजर (एसएसजीए) की तरफ से लगाई गई है.

बिजनेस इंसाइडर के मुताबिक यह एसएसजीए के उस अभियान का हिस्सा है जिसका मकसद कॉर्पोरेट सेक्टर में ऊंचे पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाना है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए कंपनी की प्रवक्ता कहती हैं कि इस कलाकृति का मकसद कॉर्पोरेट की दुनिया में लैंगिक विविधता बढ़ाना और महिला-पुरुषों के बीच तनख्वाह का अंतर कम करना है.

‘द फियरलैस गर्ल’ को जानीमानी शिल्पकार को क्रिस्टीन विस्बल ने बनाया है. वे बताती हैं, ‘वॉल स्ट्रीट परंपरागत रूप से पुरुषों के दबदबे वाली जगह है. लेकिन मेरी कलाकृति कहना चाहती है कि हम भी यहां हैं. मेरे लिए इस कलाकृति का मतलब है कि महिलाएं देखने में छोटी या कमजोर भले ही लगें लेकिन वे अपने इरादों से मजबूत हो सकती हैं.’ वहीं कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी लॉरी हीनेल का कहना है, ‘मूर्ति में लड़की का अंदाज कुछ यूं है जैसे वो यथास्थिति को चुनौती दे रही हो और उससे दो-दो हाथ करने को तैयार हो.’

एसएसजीए तकरीबन 250 अरब डॉलर के पूंजीकरण वाली दुनिया की तीसरी बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी है. इसका कहना है कि वह उन कॉर्पोरेट बोर्ड के खिलाफ वोट करेगी जो अपने यहां महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश नहीं करेंगे. इसके लिए कंपनी 3,500 कॉर्पोरेट समूहों को पत्र भी भेजने वाली है. एसएसजीए का मानना है कि जिन कंपनियों में महिलाएं शीर्ष स्तर पर होती हैं उनका वित्तीय प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर होता है. वॉल स्ट्रीट वही जगह है जहां से पूरी दुनिया में पूंजीवाद और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के नए तौर-तरीके फैलते हैं. और इसीलिए उम्मीद की जा रही है कि कॉर्पोरेट सेक्टर में महिलाओं के सशक्तिकरण की इस पहल का संदेश भी पूरी दुनिया में पहुंचेगा.