अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में हुए धमाके के मामले में स्वामी असीमानंद को बरी कर दिया गया है. जयपुर स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने इस मामले में पांच अन्य आरोपितों को भी बरी कर दिया. अदालत ने इस मामले में तीन आरोपितों भवेश पटेल, सुनील जोशी और देवेंद्र गुप्ता को दोषी पाया है. इनमें से सुनील जोशी की मौत हो चुकी है. दोषियों को सजा सुनाने के लिए 16 मार्च की तारीख तय की गई है.

राजस्थान के अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में 11 अक्टूबर, 2007 को एक बम धमाका हुआ था. इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई थी जबकि 15 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. एनआईए ने इस मामले में 14 लोगों को आरोपित बनाया था. इनमें से चार फरार हैं जबकि, एक जमानत पर बाहर है. असीमानंद और छह अन्य पर हत्या, साजिश रचने, बम लगाकर धमाका करने और घृणा फैलाने का आरोप लगाया गया था.

इस मामले की जांच पहले राजस्थान एटीएस कर रही थी. इसके बाद साल 2011 में गृह मंत्रालय ने यह एनआईए को सौंप दी. खबर के मुताबिक पूरे मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 149 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए. बचाव पक्ष की ओर से दो गवाहों को पेश किया गया. एनआईए ने छह फरवरी, 2017 को इस मामले में आरएसएस से जुड़े इंद्रेश कुमार और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को क्लीन चिट दे दी थी.