इससे अच्छा जन्मदिन का उपहार शायद ही कभी कैप्टन अमरिंदर सिंह को मिला हो. आज वे 75 साल के हुए और आज आए चुनावी नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि वे एक बार फिर से पंजाब के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली गठबंधन की हार तो पक्की मानी जा रही थी लेकिन यह भी माना जा रहा था कि आम आदमी पार्टी से कांग्रेस को कड़ी टक्कर मिलेगी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं और कैप्टन की अगुवाई में कांग्रेस ने सीधी जीत हासिल की. अब यह समझना जरूरी है कि यह कामयाबी कांग्रेस की है, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की है या फिर कैप्टन अमरिंदर सिंह की.

पंजाब की सियासी स्थिति को अगर जमीनी स्तर पर समझने की कोशिश करें तो समझ में आता है कि 2007 से 2017 तक शिरोमणि अकाली दल और भाजपा गठबंधन की जो सरकार रही, उसके प्रति आम लोगों में खासा गुस्सा था. लगातार बढ़ता रहा यह गुस्सा 2014 के लोकसभा चुनावों में भी दिखा था. उस वक्त पूरे देश में मोदी लहर चली थी लेकिन पंजाब में नरेंद्र मोदी भी अप्रभावी दिखे. उस वक्त मोदी लहर के बावजूद भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली को अमृतसर में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने धूल चटा दी थी.

लेकिन अकाली-भाजपा के खिलाफ लोगों का गुस्सा ही कांग्रेस की कामयाबा का इकलौता कारण नहीं है. अगर सिर्फ यही वजह होती तो नतीजे आम आदमी पार्टी के पक्ष में भी जा सकते थे. नतीजा अगर कांग्रेस के पक्ष में गया तो इसका मतलब यह हुआ कि न सिर्फ भाजपा और अकाली दल पर बल्कि आम आदमी पार्टी पर भी पंजाब के लोगों ने कांग्रेस को तरजीह दी है. जानकार इसके लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह को वजह बता रहे हैं. उनका मानना है कि इस बार पंजाब के लोगों ने अमरिंदर सिंह पर भरोसा दिखाया है.

2012 के विधानसभा चुनावों में भी कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में कांग्रेस जीतते-जीतते रह गई थी. लेकिन इस बार उसे स्पष्ट बहुमत मिला है. कुल मिलाकर देखा जाए तो जिस तरह से उत्तर प्रदेश में भाजपा के नाम पर नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ा गया, उसी तरह से पंजाब में चुनाव कांग्रेस ने पार्टी या राहुल गांधी के नाम पर नहीं बल्कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के नाम पर लड़ा.

अब सवाल यह उठता है कि आखिर 75 साल के कैप्टन अमरिंदर सिंह में ऐसा क्या है कि पंजाब के लोगों ने एक बार फिर से उन पर यकीन किया है. पंजाब के लोगों की मानें तो वे प्रदेश के लोगों के बीच खासे लोकप्रिय हैं. सिखों में उनकी अच्छी पैठ है तो हिंदू भी उन्हें पसंद करते हैं. इसके अलावा यह भी माना जाता है कि सिखों में भी जो कट्टरपंथी हैं, उनके बीच भी अमरिंदर की छवि अच्छी है. इन सबसे बढ़कर प्रदेश के किसानों के बीच भी अमरिंदर सिंह खासे लोकप्रिय हैं. पहले भी मुख्यमंत्री रहते हुए कैप्टन ने किसानों के कल्याण के लिए कई काम किए हैं. माना जा रहा है कि इसका फायदा भी इन चुनावों में उन्हें मिला.

इसके अलावा कैप्टन की अगुवाई में कांग्रेस को मिली जीत की एक वजह यह भी बताई जा रही है कि आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्री पद के लिए कोई उम्मीदवार जनता के सामने नहीं रखा था. ऐसे में भाजपा और अकाली दल के विकल्प के तौर पर आम आदमी पार्टी पर लोग भरोसा दिखाने से हिचक गये. जानकार मानते हैं कि अगर नवजोत सिंह सिद्धू की अगुवाई में आम आदमी पार्टी चुनाव लड़ती तो कैप्टन को कड़ी टक्कर मिल सकती थी. लेकिन आप ने सिद्धू को ठुकरा दिया और कैप्टन ने उन्हें गले लगा लिया. इसका फायदा भी कांग्रेस को पंजाब में मिला.