पाकिस्तान में विमान अपहरण के दोषी तीन लोगों को गुरुवार को फांसी दे दी गई. 24 मई, 1998 को पाकिस्तान एयरलाइंस के एक विमान का अपहरण बलूचिस्तान के तुरबत से कराची जाते हुए कर लिया गया था. विमान में उस वक्त 30 यात्री सवार थे. पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार अपहरणकर्ता इस विमान को भारत में लैंड कराना चाहते थे. विमान के पायलट ने सूझ-बूझ दिखाते हुए पाकिस्तानी हैदराबाद को भारत का भुज शहर बताकर विमान को वहां उतार दिया था. इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने भारतीय बनकर अपहर्ताओं से बात की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. इस घटना से कुछ दिन पहले ही भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किये थे. इसके जवाब में पाकिस्तान बलूचिस्तान के चागी में परमाणु परीक्षण करने वाला था. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक अपहर्ता नहीं चाहते थे कि पाकिस्तान वहां परमाणु परीक्षण करे. उस वक्त पाकिस्तान ने विमान अपहरण की घटना में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया था.
विमान अपहर्ता नहीं चाहते थे कि भारत के परमाणु परीक्षणों के जवाब में पाकिस्तान बलोचिस्तान में परीक्षण करे. उस वक्त पाकिस्तान ने अपहरण की घटना में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया था.
विमान अपहरण के दोषियों के अलावा पाकिस्तान में चार और लोगों को गुरुवार को फांसी दे दी गई. पाकिस्तान में साल 2008 में फांसी देने पर रोक लगा दी गयी थी. पिछले साल दिसंबर में एक स्कूल पर हुए आतंकी हमले के बाद सरकार ने खूंखार आतंकियों को फांसी देने पर लगी रोक हटा दी थी. इसके बाद मार्च 2015 में इस रोक को पूरी तरह से हटा दिया गया. तब से पाकिस्तान में 125 कैदियों को फांसी पर लटकाया जा चुका है.
फीफा अधिकारियों ने विश्व कप के लिए भी रिश्वत ली थी, कैमरन ने फीफा प्रमुख से पद छोड़ने को कहा
फीफा के सात बड़े अधिकारियों की स्विटजरलैंड में हुई गिरफ्तारी के बाद, अमेरिका की अटॉर्नी जनरल लॉरेटा लिंच का कहना है कि उनके विभाग ने 14 लोगों के खिलाफ इस मामले में कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है. लिंच के मुताबिक इनमें फीफा के बड़े अधिकारी, उसके अधीन आने वाली फुटबॉल की क्षेत्रीय संस्थाओं के प्रमुख और कई स्पोर्ट्स मार्केटिंग कंपनियों के अधिकारी शामिल हैं. फीफा और इससे जुड़े संगठनों के प्रमुखों पर दुनिया भर के देशों में फुटबॉल के आयोजन कराने और इनके व्यावसायिक अधिकार (मीडिया और मार्केटिग राउट्स) देने के एवज में रिश्वत लेने के आरोप हैं. लिंच के मुताबिक न केवल 2011 में हुए फीफा अध्यक्ष के चुनाव के दौरान रिश्वत ली गई बल्कि 2010 का विश्वकप दक्षिण अफ्रीका को देने के लिए भी ऐसा किया गया. यहां तक कि ब्राजील की टीम का प्रायोजक बनने के लिए भी एक अमेरिकी कंपनी द्वारा रिश्वत देने की बात अमेरिका की अटॉर्नी जनरल ने कही है. अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक फीफा और उससे जुड़ी फुटबॉल संस्थाओं के अधिकारियों ने पिछले 24 साल में करीब 150 मिलियन डॉलर (लगभग 950 करोड़ रूपए) की रिश्वत ली है. इन आरोपों के सिद्ध होने पर आरोपितों को 20 साल तक की जेल हो सकती है. चूंकि रिश्वत लेने की योजनाएं अमेरिका में हुई बैठकों में बनाई गईं और धन देने-लेने के लिए अमेरिकी बैंकों का इस्तेमाल किया गया इसलिए यह मामला अमेरिका में चलाया जा रहा है.
इस मामले के सामने आने के बाद फीफा के मुखिया सेप ब्लाटर को उनके पद से हटाने की मांग शुरू हो गयीं हैं. ऐसी मांग करने वालों में डेविड कैमरन सहित कई देशों के प्रमुखों के अलावा फीफा की कई प्रायोजक कंपनियां भी शामिल हैं.
यमन में सऊदी हवाई हमले में 45 की मौत
सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना के लड़ाकू विमानों ने यमन की राजधानी सना में गोलाबारी की है. यहां पुलिस मुख्यालय पर हुए एक हमले में कम से कम 45 लोगों के मारे जाने और 100 लोगों के घायल होने की आशंका है. हूथी विद्रोहियों का कहना है कि यह हमला तब हुआ, जब कुछ हूथी समर्थित सैनिक पुलिस मुख्यालय के करीब निर्वासित राष्ट्रपति आबेद रब्बो मंसूर हादी के समर्थक सैनिकों पर हमले के लिए इकट्ठा हुए थे. हूथी नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी एक बयान में कहा है कि हमलों में सुरक्षा बलों के कम से कम 45 सदस्यों की मौत हुई है और 286 घायल हुए हैं.
पाकिस्तानी अख़बार डॉन ने प्रत्यक्ष दर्शियों के हवाले से लिखा है कि सऊदी विमानों ने बुधबार को हूथी विद्रोहियों द्वारा नियंत्रित पश्चिमी ‘होदिदा’ प्रांत में एक नौसेना मुख्यालय सहित हूथियों का गढ़ कहे जाने वाले ‘सादा’ और ‘हज्जाह’ पर भी हवाई हमले किये. ये हमले, सऊदी सेना के 26 मार्च से शुरू हुए, उस अभियान का हिस्सा हैं, जो यमन के निर्वासित राष्ट्रपति आबेद रब्बो मंसूर हादी को पुनर्स्थापित करने के लिए चलाया जा रहा है. आबेद मार्च 2015 से सऊदी अरब में रह रहे हैं. इससे पहले 22 जनवरी 2015 को हूथी विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना और राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया था.
विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्लूएचओ) के अनुसार पिछले दो महीनों से चल रहे इन हमलों में करीब दो हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है, आठ हज़ार लोग घायल हुए हैं और लाखों लोगों को यमन में तुरंत चिकित्सा की जरूरत है.