मोदी सरकार ने देश के हर गांव में मई, 2017 तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. लेकिन डीएनए की एक खबर बताती है कि इस समय सीमा तक यह लक्ष्य हासिल कर पाना शायद ही संभव हो क्योंकि कई राज्यों ने इस दिशा में तेजी नहीं दिखाई है.

खबर के मुताबिक केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि दो साल पहले उन गांवों की संख्या 12,480 थी जिनमें बिजली नहीं थी. अभी यह आंकड़ा 5,150 तक पहुंचा है. यानी दो साल में सिर्फ 60 फीसदी गांवों को ही रोशन किया जा सका है. झारखंड, ओडिशा, बिहार और छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन इस मामले में सबसे खराब रहा है. इन राज्यों में क्रमश: 858, 848, 570 और 464 गांवों में बिजली नहीं पहुंच पाई है. इसके बाद मेघालय (230), जम्मू-कश्मीर (102) और मणिपुर (85) का नंबर आता है. यानी इन सभी राज्यों में कुल मिलाकर 3,157 गांव ऐसे हैं, जो अब तक बिजली पहुंचने की राह देख रहे हैं.

सूत्र बताते हैं कि इन सभी राज्यों के प्रदर्शन को देखते हुए ऊर्जा मंत्रालय की ओर से मार्च के पहले सप्ताह में उन्हें एक सख्त पत्र लिखा गया है. इसमें उन्हें मई, 2017 तक निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के लिए तेजी से काम करने का निर्देश दिया गया है. हालांकि समय सीमा के बाबत ऊर्जा मंत्रालय में ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर दिनेश अरोरा कुछ और ही दावा करते हैं. वे कहते हैं, ‘असल समय सीमा मई, 2018 तय की गई है. मई, 2017 की समय सीमा तो हमने आंतरिक तौर पर निर्धारित कर रखी है.

वैसे, इस मामले में उत्तर प्रदेश और राजस्थान का प्रदर्शन काफी शानदार रहा है. दो साल के भीतर उत्तर प्रदेश के 1,517 गांवों तक बिजली पहुंची है. वहां अब सिर्फ 12 गांव ऐसे बचे हैं, जहां बिजली नहीं है. इसी तरह राजस्थान में सिर्फ एक गांव ही बिना बिजली का है. दो साल में यहां के 496 गांवों को रोशन किया गया है. मध्य प्रदेश का प्रदर्शन भी ठीक-ठाक है जहां 56 गांवों में ही बिजली पहुंचाना बाकी है.