गोवा में गुरुवार को मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने 16 के मुकाबले 22 मतों से विश्वासमत जीत लिया. लेकिन राज्य में मची राजनीतिक उथल-पुथल के पूरी तरह थमने के आसार अब भी नहीं दिखते. भाजपा के विश्वासमत प्रस्ताव जीत लेने के बाद कांग्रेस के असंतुष्ट विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री प्रताप सिंह राणे के बेटे विश्वजीत राणे ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और विधायक पद से इस्तीफे का ऐलान कर दिया. इतना ही नहीं उनके पिता प्रताप सिंह राणे
के भी भाजपा खेमे में जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं. कहा जा रहा है कि सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद सरकार बनाने में नाकाम रहने से कांग्रेसी विधायकों में काफी असंतोष है. इस असंतोष को भांपते हुए भाजपा आक्रामक तरीके से इसे अपने पक्ष में भुनाने की कोशिशों में जुट गई है. जानकारों के मुताबिक संभव है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी के कुछ और विधायक पार्टी का साथ छोड़ दें.

विश्वजीत राणे ने विश्वास प्रस्ताव के दौरान मतदान में भाग नहीं लिया था. पार्टी और विधायक पद से इस्तीफे का ऐलान करते हुए उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व और पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह पर सरकार न बना पाने का ठीकरा फोड़ा. बुधवार को भी उन्होंने पार्टी नेतृत्व को इसके लिए कोसा था. कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने तब राणे पर जवाबी हमला बोला था. उन्होंने कहा था कि राणे भाजपा के साथ मिल गए हैं. सिंह का आरोप तब सही साबित होता हुआ दिखा जब विश्वजीत राणे ने पार्टी के साथ-साथ विधायकी भी छोड़ दी. हालांकि राणे ने अपनी भविष्य की योजनाओं का खुलासा नहीं किया लेकिन, कहा जा रहा है कि वे भाजपा में जाएंगे. उनकी छोड़ी गई सीट से खुद मुख्यमंत्री पर्रिकर चुनाव जीतकर विधानसभा जा सकते हैं.

राजनीतिक गलियारों में विश्वजीत राणे के पाला बदल लेने का गहरा अर्थ लगाया जा रहा है. विश्वजीत के पिता प्रताप सिंह राणे गोवा में कांग्रेस के दिग्गज नेता हैं. वे पांच बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे हैं

राजनीतिक गलियारों में विश्वजीत राणे के पाला बदल लेने का गहरा अर्थ लगाया जा रहा है. विश्वजीत के पिता प्रताप सिंह राणे गोवा में कांग्रेस के दिग्गज नेता हैं. वे पांच बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे हैं. राज्य में कांग्रेस संगठन पर राणे परिवार की मजबूत पकड़ मानी जाती है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राणे परिवार अब भाजपा के नजदीक जा चुका है. न केवल बेटा विश्वजीत बल्कि पिता प्रताप सिंह राणे भी भाजपा का दामन थाम सकते हैं. यानी वे भी अपनी विधायकी छोड़ेंगे. कहा जा रहा है कि इसके बदले में उन्हें राज्यपाल बनाया जा सकता है.

ऐसे में कयास लग रहे हैं कि आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी में बड़ी टूट हो सकती है. राणे परिवार का कांग्रेस पार्टी के कई विधायकों पर असर रहा है इसलिए कई मान रहे हैं कि वे दोनों अकेले ही भाजपा का दामन थामेंगे, ऐसा नहीं लगता. यानी उनके कुछ और ‘साथी’ भी पर्रिकर सरकार का साथ दे सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक पिता की सीट खाली होने पर वहां से उनकी विरासत को बेटे विश्‍वजीत आगे बढ़ाएंगे.

विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा गोवा में अपनी सरकार बना लेने भर से ही संतुष्ट नहीं है. उसकी कोशिश है कि सरकार को अगले पांच साल तक स्थिर रखने के लिए उसे और विधायकों का साथ मिले. यही गोवा में भाजपा का ‘गेमप्लान’ है. इस योजना के प्रति भाजपा काफी गंभीर है. उसे अहसास है कि गोवा फॉरवर्ड पार्टी और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी जैसे छोटे दलों पर निर्भरता सरकार की स्थिरता और उसके प्रदर्शन पर बुरा असर डाल सकती है. इसलिए पार्टी की कोशिश है कि उसके खेमे में कुछ और विधायक आ जाएं. केंद्रीय मंत्री और गोवा भाजपा के प्रभारी नितिन गडकरी का एक बयान भी इसका संकेत देता है. उनका कहना है कि कांग्रेस गोवा में कई समस्याओं से जूझ रही है और जल्दी ही कांंग्रेस पार्टी के कुछ अन्य विधायक भी विश्वजीत राणे की राह चल सकते हैं.

यानी कांग्रेस के खेमे में जल्द ही एक बड़ी सेंध लगने की संभावना बन गई है