नीदरलैंड्स से एक अहम खबर आई है. वहां हुए चुनावों में विवादास्पद राजनेता गीर्ट विलडर्स की धुर दक्षिणपंथी फ्रीडम पार्टी को प्रधानमंत्री मार्क रूट के दल पीपुल्स पार्टी फॉर फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी के हाथों मात मिली है. इसे दक्षिणपंथी लोकलुभावन राजनीति की हार का एक प्रतीक भी कह सकते हैं. नीदरलैंड्स के इन चुनावों पर विश्लेषकों की करीबी नजर थी. यही स्थिति यूरोप में इस साल होने वाले बाकी बड़े चुनावों के के मामले में भी होगी. अगले महीने फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और इसके बाद जर्मनी में भी आम चुनाव होंगे.

यूरोप में आर्थिक सुस्ती और बढ़ते इस्लामी आतंकवाद के खतरे के बीच इन सभी देशों में धुर दक्षिणपंथी पार्टियों का राजनीतिक उभार तेजी से हुआ है. उदाहरण के लिए विलडर्स का रुख साफ तौर पर यूरोपीय संघ (ईयू) और प्रवासी विरोधी रहा है. वे तो कुरान पर प्रतिबंध लगाने और सभी मस्जिदों और इस्लामिक केंद्रों को बंद करने तक की बात कह चुके हैं. उनकी हार पर प्रधानमंत्री रूट ने कहा है कि ब्रेक्जिट और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद उभरी गलत तरीके की लोकलुभावन राजनीति को नीदरलैंड्स की जनता ने नकार दिया है. शायद कॉन्टिनेंटल यूरोप उससे अलग राह पर जाएगा जो एंग्लो-सैक्सन दुनिया ने अपने लिए चुनी है.

नीदरलैंड्स के इस चुनाव परिणाम पर जाएं तो शायद यूरोप के वोटर को आखिरकार अहसास हो गया है कि कट्टरपंथ और अल्पसंख्यक समुदायों को अलग-थलग करने की नीति के अंधियारे पहलू भी हैं. खासतौर पर ब्रेक्जिट के बाद बने हालात में तो यह बात और भी सच है जहां ब्रिटिश सरकार को इसके लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है कि वह ईयू से बाहर निकलने के अपने फैसले पर अच्छाई का मुलम्मा कैसे चढ़ाए. हालांकि उसे ईयू से बाहर निकलने के संबंध में दो साल लंबी प्रक्रिया शुरू करने के लिए संसद से इजाजत मिल गई है, पर यह भी सच है कि ब्रिटेन को इसके अहम आर्थिक परिणाम झेलने होंगे. इसके अलावा वहां स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड भी जनमतसंग्रह के जरिये ब्रिटेन से अलग होने की धमकी दे रहे हैं. ईयू से अलग होने की प्रक्रिया में अपने यहां ही अलगाववाद का जिन्न बोतल से बाहर न निकल जाए, यही सोचकर अब यूरोप के लोग दक्षिणपंथी लोकलुभावनवादी राजनीति पर फिर गंभीरता से सोच रहे हैं. निश्चित रूप से यह यूरोप में ईयू समर्थक पार्टियों के लिए प्रोत्साहन का काम करेगा. नीदरलैंड्स ने राह दिखा दी है. क्या फ्रांस और जर्मनी इस पर आगे बढ़ेंगे? (स्रोत)