उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम अभी तय नहीं हुआ है. लेकिन वहां ‘सरकार’ ने काम शुरू कर दिया है. सरकार यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मशीनरी (खास अफसर). सूत्रों की मानें तो राज्य के शीर्ष अफसरों को प्रधानमंत्री की इस मशीनरी से निर्देश मिलना शुरू हो चुके हैं. उनके हिसाब से प्रदेश की अफसरशाही ने 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए आगामी योजनाएं बनाना शुरू कर दिया है.

द इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के अफसरों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्र और कैबिनेट सेक्रेटरी पीके सिन्हा की ओर से निर्देश मिले हैं. उन्हें बता दिया गया है कि काम और प्रदर्शन के लिहाज से उनकी पहली डेडलाइन मार्च-अप्रैल 2019 है. यानी वह समय जब लोकसभा चुनाव हो रहे होंगे. साफ है कि प्रदेश के अफसरों को इससे पहले प्रधानमंत्री की महात्वाकांक्षी परियोजनाओं को प्रभावी तरीके से धरातल पर लाना होगा. कई अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर इसकी पुष्टि की है.

एक अधिकारी कहते हैं, ‘हमारे पास प्रधानमंत्री की योजना के हिसाब से उत्तर प्रदेश में बदलाव लाने के लिए पांच साल का वक्त नहीं है. सिर्फ दो साल में ही हमारे प्रदर्शन की परख होनी है. उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं. इसलिए हमें तेजी से प्रदेश के विकास के लिए काम करना होगा.’ एक अन्य शीर्ष अधिकारी बताते हैं, ‘हमें तीन-चार मोर्चाें पर काम करने को कहा गया है. पहला- कानून-व्यवस्था, दूसरा- प्रदेश में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति, तीसरा- कसाईघर बंद करना, चौथा- किसानों की कर्ज माफी और गन्ना किसानों को बकाया भुगतान.’

सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव और कैबिनेट सेक्रेटरी हर चीज खुद देख रहे हैं क्योंकि ये दोनों अफसर उत्तर प्रदेश कैडर के ही हैं. उन्हें प्रदेश और यहां के प्रशासनिक ढांचे के बारे में पूरी जानकारी है. राज्य की अफसरशाही 30 पेज के भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र को भी बारीकी से खंगाल रही है. उसके हिसाब से अगली सरकार के लिए अन्य आगामी योजनाओं की एक बुकलेट तैयार की जा रही है. प्रदेश के प्रमुख सचिव राहुल भटनागर कहते हैं, ‘मैंने सभी विभागों को इस हिसाब से कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं.’