केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों में प्रमुख भूमिका निभाने वाले मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम अब अक्टूबर 2019 तक अपने पद पर बने रहेंगे. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मोदी सरकार ने उनके कार्यकाल को अगले दो साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है. अरविंद सुब्रमण्यम अक्टूबर 2014 में मुख्य आर्थिक सलाहकार बने थे.

वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ काम करने वाले अरविंद सुब्रमण्यम ने न केवल वस्तु और सेवा (जीएसटी) कानून का मसौदा तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाई है, बल्कि इस दौरान कई नए विचारों को भी सामने रखने का काम किया है. रेल यात्रियों के आधार पर उन्होंने यह जानकारी देकर सबको हैरत में डाल दिया था कि देश के भीतर विस्थापितों की सालाना संख्या 90 लाख से ज्यादा है जो अब तक के आकलन से कहीं अधिक है.

यही नहीं, अरविंद सुब्रमण्यम को सभी नागरिकों को एक निश्चित रकम देने संबंधी ‘सबके लिए आधारभूत आय’ (यूनिवर्सल बेसिक इनकम) योजना का सुझाव देने के लिए भी जाना जाता है. उनका मानना है कि इसके जरिय जनता को लाभ या छूट देने वाली मौजूदा 1000 से ज्यादा योजनाओं को खत्म किया जा सकता है. इसके अलावा उन्होंने बैंकों के फंस चुके कर्ज की समस्या से निपटने के लिए एक संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी बनाने का भी सुझाव दिया है.

हालांकि, भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी उनका विरोध करते रहे हैं. बीते साल जून में उन्होंने अरविंद सुब्रमण्यम पर बौद्धिक अधिकार के मामले में भारत का विरोध करने का आरोप लगाया था और उन्हें पद से हटाने की मांग की थी. इसके अलावा जीएसटी पर कांग्रेस के रूख के पीछे उन्होंने अरविंद सुब्रमण्यम का हाथ बताया था. लेकिन, मोदी सरकार ने उनके इन आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया था.