बिहार की सत्ता में साझीदार राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) के बीच रिश्ते सहज न होने का एक और प्रमाण सामने आया है. सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक, राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का तख्ता पलट करने की योजना बना ली थी.

खबर में बताया गया है कि लालू प्रसाद यादव ने अपने बेटे और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने का मंसूबा बांधा था. इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के दोबारा मुख्यमंत्री बनने पर राजद का समाजवादी पार्टी (सपा) में विलय किया जाना था. इसके बाद कांग्रेस की मदद से बिहार की सत्ता में नेतृत्व परिवर्तन. खुद लालू प्रसाद और अखिलेश ने इस तरह के संकेत देने भी शुरू कर दिए थे. लालू ने कुछ दिन पहले कहा भी था, ‘मैं और नीतीश बूढ़े हो रहे हैं. ऐसे में, आने वाले दिनों में तेजस्वी जैसे होनहार युवक ही हम दोनों की राजनीतिक विरासत संभालेंगे.’

चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश ने भी कहा था, ‘मेरे दिल की आवाज है कि उत्तर प्रदेश में मेरे नेतृत्व में दोबारा सरकार बनेगी. तब 2019 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर मैं आगे बढ़ूंगा. कांग्रेस तो साथ है ही, फिर लालू प्रसाद यादव और ममता बनर्जी के साथ मिलकर तैयारी करूंगा.’ इसी दौरान लालू प्रसाद की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का भी बयान आया. इसमें उनका कहना था, ‘प्रदेश की जनता तेजस्वी को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है.’ हालांकि सूत्र अब यह भी बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को मिले प्रचंड बहुमत ने लालू की योजना ढेर कर दी है.

बताते चलें कि 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में राजद के 80 और नीतीश की जदयू के 71 विधायक हैं. कांग्रेस के 27 विधायक मूल रूप से लालू के ही साथ हैं. इसके अलावा लालू ने जदयू के 25 उन विधायकों को तोड़ने की तैयारी की थी, जो नीतीश के शराबबंदी के फैसले से नाखुश हैं. बताते हैं कि लालू की इस योजना की भनक नीतीश को भी लग चुकी थी. इसीलिए उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनाव में दिलचस्पी नहीं ली, जिसका फायदा भाजपा को प्रदेश में पूर्वांचल की कुर्मी बहुल सीटों पर मिला.