पाकिस्तान में विवादित सैन्य अदालतों को दोबारा गठित किए जाने का रास्ता साफ हो गया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक आतंकी हमलों में बढ़ोतरी को देखते हुए सैन्य अदालतों को पुनर्जीवित करने पर पाकिस्तान के सभी राजनीतिक दल सहमत हो गए हैं. इन्हें अगले दो साल के लिए गठित किया जाएगा. इनका मकसद आतंकियों, उनके हिमायतियों और वित्तीय मददगारों पर लगाम लगाना होगा.

रिपोर्ट के मुताबिक इस बारे में गुरुवार को नेशनल असेंबली के अध्यक्ष सरदार अयाज सादिक ने नेतृत्व में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं की बैठक की बैठक हुई. इसके बाद उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा होने के नाते सभी दलों ने इस पर सहमति दी है. सादिक ने बताया कि इसके लिए संविधान में संशोधन किया जाएगा.

पाकिस्तान में सैन्य अदालतों को दिसंबर 2014 में पेशावर के सेना के स्कूल पर आतंकी हमले के बाद गठित किया गया था. इस हमले में 150 मौतें हुई थीं, जिनमें ज्यादातर बच्चे शामिल थे. जनवरी 2015 में दो साल के लिए गठित की गई इन सैन्य अदालतों ने 161 लोगों को फांसी की सजा सुनाई थी, जिनमें केवल 21 को ही सजा मिल पाई है. हाल ही में देश में आतंकी हमलों में बढ़ोतरी को देखते हुए सेना ने सैन्य अदालतों को दोबारा गठित करने की मांग रखी थी.

फरवरी में सूफी संत शाहबाज कलंदर की दरगाह पर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के हमले में 80 से ज्यादा लोग मारे गए थे. इसे पेशावर के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है. इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने कई इलाकों में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है.