केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2000 रुपये के नोट को लेकर स्थिति साफ की है. उन्होंने कहा कि इसे वापस लेने की कोई योजना नहीं है. उन्होंने यह बात लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कही. 2000 रुपये के नए नोट को पिछले साल आठ नवंबर को नोटबंदी के ऐलान के बाद लाया गया था. खबरों के मुताबिक सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से बाजार में छोटे मूल्य के नोटों की दिक्कत को देखते हुए 500, 100 और 50 रुपये के नोटों को अधिक संख्या में छापने के लिए कहा है.

वित्त मंत्री ने अपने जवाब में यह भी बताया कि 10 दिसंबर, 2016 तक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास 500 और 1000 रु के पुराने नोटों के रूप में 12.44 लाख करोड़ रुपये वापस आ चुके हैं. साथ ही, उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद तीन मार्च, 2017 तक 12 लाख करोड़ रुपये बाजार में डाले जा चुके हैं. 27 जनवरी, 2016 को यह आंकड़ा 9.92 लाख करोड़ रुपये का था. अरुण जेटली ने कहा कि इस संबंध में प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम आंकड़ा जारी किया जाएगा.

वित्त मंत्री ने नोटबंदी के फायदे गिनाते हुए कहा कि इससे बैंकों में जमा राशि में बढ़ोतरी हुई जिससे, ब्याज दरों में कमी आई है. उन्होंने जीडीपी आंकड़ों के पहले की तुलना में अधिक सही होने की बात भी कही. इस हफ्ते एटीएम से निकासी की सीमा खत्म किए जाने के साथ ही नोटबंदी से जुड़े सभी तरह के प्रतिबंध हट गए हैं.