कई दिनों की जद्दोजहद के बाद भाजपा ने उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पद के लिए त्रिवेंद्र सिंह रावत के नाम पर मुहर लगा दी है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक रहे रावत को देहरादून में पार्टी विधायक दल की बैठक में नेता चुना गया. बताया जा रहा है कि वे 18 मार्च को शपथ लेंगे.

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भारी जीत दर्ज करते हुए 70 में से 57 सीटों पर जीत का परचम लहराया था. सत्ताधारी कांग्रेस सिर्फ 11 सीटों पर सिमट कर रह गई. इसके बाद राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसे लेकर सतपाल महाराज और प्रकाश पंत जैसे नामों पर भी कयास लग रहे थे. लेकिन आखिर में बाजी मारी राज्य की डोईवाला सीट से जीत हासिल करने वाले त्रिवेंद्र सिंह रावत ने.

जानकारों के मुताबिक 56 साल के त्रिवेंद्र सिंह रावत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के काफी करीबी हैं. 2014 के आम चुनाव में उन्होंने उत्तर प्रदेश में अमित शाह के साथ रहकर काम किया था. राजनीतिक रूप से सबसे अहम इस सूबे में पार्टी का प्रदर्शन असाधारण रहा तो उनका कदम भी बढ़ा. इस समय वे मोदी सरकार की एक अहम परियोजना नमामि गंगे के संयोजक भी हैं. त्रिवेंद्र सिंह रावत के पास झारखंड में पार्टी का प्रभार भी है.

लेकिन त्रिवेंद्र सिंह रावत को उत्तराखंड की कमान मिलने की वजह सिर्फ मोदी-शाह की जोड़ी से उनकी निकटता नहीं है. द हिंदू से बातचीत में भाजपा के एक नेता कहते हैं, ‘त्रिवेंद्र जी से पार पाना मुश्किल है. पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को उत्तराखंड में ऐसे ही किसी नेता की आवश्यकता है...वहां नौकरशाही को काबू करने की जरूरत है और त्रिवेंद्र जी इस काम के लिए बिल्कुल सही शख्स हैं.’