क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा अब अगला मोर्चा पश्चिम बंगाल में खोलने वाले हैं? या फिर पश्चिम बंगाल के साथ केरल में भी समान रूप से सक्रियता बढ़ाई जा सकती है? हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन दोनों मसलों पर अगले दो-चार दिन के भीतर ही फैसला लिया जा सकता है. यह फैसला आरएसएस की शीर्ष इकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में होगा.

आरएसएस के एक शीर्ष पदाधिकारी बताते हैं कि प्रतिनिधि सभा की सालाना बैठक तमिलनाडु के कोयंबटूर में हो रही है. इसमें संघ नेतृत्व के अलावा उसके करीब 40 आनुषंगिक संगठनों के प्रमुख भी भाग लेंगे. इसमें पश्चिम बंगाल और केरल में हिंदुओं के खिलाफ जारी हिंसा के मसले पर प्रमुख रूप विचार होगा. वे कहते हैं, ‘केरल में तो फिर भी आरएसएस के स्वयंसेवक ही निशाना बन रहे हैं लेकिन बंगाल में आम हिंदू इस हिंसा का शिकार हो रहा है. राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार इसे रोकने में अब तक पूरी तरह नाकाम साबित हुई है. ऐसे में ज्यादा संभावना इसी बात की है कि संघ अब पश्चिम बंगाल पर ध्यान केंद्रित करे.’

वैसे यह पहला मौका नहीं है, जब संघ केरल और पश्चिम बंगाल में हिंदुओं के खिलाफ जारी कथित हिंसा का मुद्दा उठा रहा है. पिछले साल अक्टूबर में हैदराबाद में हुई संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी इस पर एक संकल्प पारित किया गया था. इसमें केंद्र सरकार से मांग की गई थी कि वह ‘केरल में राजनीति से प्रेरित हत्याओं’ और ‘पश्चिम बंगाल में हिंदुओं के खिलाफ जिहादी संगठनों की हिंसा’ के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी इस संबंध में ज्ञापन दिया गया. लेकिन जैसा कि आरएसएस पदाधिकारी कहते हैं, ‘अब तक हिंसा के मामलों में कमी नहीं आई है. इसलिए नई रणनीति तैयार करने की जरूरत महसूस हुई है.’

वहीं इकनॉमिक टाइम्स की एक खबर बताती है कि भाजपा भी अब पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने जा रही है. इसके लिए अपने रसूख और ताकत का इस्तेमाल कर केंद्र सरकार उन घोटालों की जांच में तेजी लाएगी, जो पश्चिम बंगाल और तृणमूल कांग्रेस से जुड़ते हैं. जैसे कि सारदा घोटाला, नारद स्टिंग कांड, रोज वैली चिट फंड घोटाला आदि. नारद स्टिंग कांड में तो कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी भाजपा को मौका दे दिया है. हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जारी आदेश में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है. इन घोटालों में सुब्रत बनर्जी, सुदीप बंदोपाध्याय, मुकुल राय, जैसे तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेता फंसे हुए हैं.