अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ताइवान के जरिए चीन को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ट्रंप प्रशासन अब ताइवान के साथ एक बड़ा रक्षा सौदा करने जा रहा है. इसमें उन्नत रॉकेट प्रणाली और एंटी-शिप मिसाइल जैसे हथियार शामिल हैं.

रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि यह रक्षा सौदा ओबामा प्रशासन के समय प्रस्तावित सौदे से काफी बड़ा हो सकता है. बीते साल दिसंबर में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ताइवान के साथ एक अरब डॉलर के रक्षा सौदे पर चल रही बातचीत रोक दी थी. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद के तत्कालीन प्रवक्ता नेड प्राइस के मुताबिक ओबामा प्रशासन ने अगले प्रशासन को फैसला लेने का मौका देने के लिए इस बातचीत को रोक दिया था.

रिपोर्ट के मुताबिक एक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि ट्रंप प्रशासन इस रक्षा सौदे पर आगे बढ़ने को लेकर काफी उत्सुक है, लेकिन ताइवान को लेकर चीन की संवेदनशीलता और उत्तर कोरिया की चुनौती से निपटने में उसकी भूमिका को देखते हुए वह इस पर धीरे-धीरे कदम बढ़ा रहा है. जानकारों के मुताबिक इसलिए इसमें कई महीने लग सकते हैं. उधर, ताइवान के सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन और ताइवान ने इस सौदे को लेकर बातचीत शुरू कर दी है. हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है.

लेकिन, जानकारों का मानना है कि अगर ताइवान और अमेरिका के बीच यह रक्षा सौदा अपनी मंजिल तक पहुंचता है तो चीन और अमेरिका के रिश्तों में जबरदस्त दरार आना तय है. इसकी वजह यह है कि चीन, ताइवान को अपना स्वायत्त राज्य मानता है और इससे अलग जाते किसी भी रुख को वह बेहद गंभीरता से लेता है. दिसंबर में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन से फोन पर बात करने और वन चाइना पॉलिसी पर सवाल उठाने जैसे मौकों पर चीन की प्रतिक्रिया से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.