कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में पार्टी की हार और मणिपुर-गोवा में हुई किरकिरी के बाबत जिम्मेदारी झटकते नजर आ रहे हैं. बल्कि वे यह जिम्मेदारी पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर डालने की कोशिश करते दिख रहे हैं. उन्होंने शुक्रवार को द इंडियन एक्सप्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान कहा, ‘राहुल गांधी से मेरी शिकायत है कि वे निर्णायक कार्रवाई नहीं करते. मैंने उनसे कई बार यह बात कही भी है. लेकिन जब मैं बार-बार यही दोहराता हूं तो वे उल्टा मुझ पर ही नाराज हो जाते हैं.’

दिग्विजय ने इस कार्यक्रम में कहा, ‘मैं कहूंगा कि अब हम पूरी तरह नई पार्टी चाहते हैँ. जिसका नया चार्टर हो. नया रोडमैप हो. प्रचार की नई शैली हो. पूरी तरह नई कांग्रेस बनानी होगी और राहुल गांधी से बेहतर कोई यह काम नहीं कर सकता. उन्हें करना ही होगा.’ पार्टी को लगातार मिल रही पराजयों पर उन्होंने कहा, ‘हमें बदलते वक्त के साथ कांग्रेस को ढालना होगा. मध्यवर्ग की आकांक्षाओं-अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए पार्टी की रणनीति तैयार करनी होगी. यह सब नेतृत्व को करना होगा...राहुल गांधी को करना होगा.’

दिग्विजय सिंह का आगे कहना था, ‘साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी. इस समिति ने फरवरी 2015 में अपनी रिपोर्ट दे दी. इसमें भी पार्टी के नए सिरे से गठन की जरूरत बताई गई थी. इस सिलसिले में कई अनुशंसाएं की गई थीं. लेकिन इस रिपोर्ट पर भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. यह काम होना चाहिए.’

दिग्विजय सिंह के मुताबिक कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व की समस्या नहीं है. उनका कहना था, ‘हमारे पास नेता हैं. नेहरू-गांधी परिवार सबसे बड़ा कारक है, जिसने कांग्रेस को एक साथ जोड़कर रखा है. मुद्दा यह नहीं है. असल मसला यह है कि पार्टी का पूरी तरह कायाकल्प किया जाना चाहिए. उसका पूरा ढांचा नए सिरे से खड़ा किया जाना चाहिए.’ प्रियंका गांधी वॉड्रा की भूमिका के बारे में उन्होंने कहा, ‘इसका फैसला परिवार को करना है. लेकिन अगर प्रियंका सक्रिय राजनीति में आती हैं, तो पूरे देश में पार्टी के कार्यकर्ताओं को भारी प्रसन्नता होगी.’