तीन तलाक पर बीते कुछ समय से जारी बहस के बीच मुस्लिम समुदाय के 10 लाख से भी ज्यादा लोगों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर करने की खबर है जिसमें इस विवादास्पद प्रथा को खत्म करने की मांग की गई है. यह याचिका मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की पहल बताई जाती है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा संगठन है.

खबरों के मुताबिक जिन 10 लाख लोगों ने इस पर दस्तखत किए हैं उनमें ज्यादातर महिलाएं हैं. कई महिलाएं तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट भी पहुंची हैं और शीर्ष अदालत ने इन मामलों की सुनवाई जारी है. केंद्र की मोदी सरकार अदालत में कह चुकी है कि इस्लाम में तीन तलाक जरूरी धार्मिक रिवाज नहीं है और वह इसका विरोध करती है क्योंकि संविधान पुरुषों और महिलाओं को बराबरी का अधिकार देता है.

हालांकि आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस प्रथा का बचाव किया है. उसकी दलील है कि किसी महिला को मारने से बेहतर है कि उसे तलाक दे दिया जाए. पर्सनल लॉ बोर्ड के मुताबिक यह महजब का मामला है जिसमें अदालत को दखल नहीं देना चाहिए.

पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक रैली में यह मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा था कि तीन तलाक की आड़ में मुस्लिम महिलाओं का जीवन बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता. प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया था कि विपक्ष इस मामले को अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है.