पारदर्शिता को बढ़ावा देने वाला सूचना अधिकार कानून खुद उपेक्षा का शिकार होता जा रहा है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत रहस्यमयी कारणों से रद्द होने वाले आवेदनों की संख्या काफी ज्यादा है. शुक्रवार को जारी केंद्रीय सूचना आयोग की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक 2015-16 में 9.76 लाख सूचना आवेदन आए, इनमें से अधिकारियों ने 6.62 फीसदी आवेदनों को रद्द कर दिया. वहीं, इससे पहले 2014-2015 में 7.55 लाख आवेदन आए थे और 8.39 फीसदी आवेदन रद्द हुए थे. दो साल पहले के मुकाबले पिछले साल रद्द आवेदनों का प्रतिशत घटने के बावजूद 20 प्रतिशत ज्यादा आवेदन जमा किए थे.

कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव से जुड़े वेंकटेश नायक के मुताबिक पिछले साल रद्द आवेदनों में ज्यादातर को सूचना कानून में दर्ज आधारों के बजाए ‘अन्य’ जैसी रहस्यमयी वजह देकर खारिज किया गया है. इस ‘अन्य’ वर्ग के तहत रद्द आवेदनों की संख्या 43 फीसदी है. वहीं, आरटीआई कानून की धारा आठ के तहत 47 फीसदी आवेदन रद्द हुए हैं. इसके अलावा एक फीसदी आवेदनों को निजी कॉपीराइट के तहत, जबकि सात फीसदी आवेदनों को सुरक्षा संस्थानों ने रद्द किया है.

रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने 2015-16 में 28,188 अपीलों और शिकायतों का निपटारा किया, जबकि इसी अवधि में आयोग के पास 25,960 शिकायतें दर्ज हुईं. इसके अलावा एक अप्रैल 2016 तक लंबित मामलों की संख्या 34,982 रही. आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक 2015-16 में जन सूचना अधिकारियों पर 10.52 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 9.41 लाख का भुगतान हुआ, जबकि 1.25 लाख जुर्माने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी.