कालेधन पर बने विशेष जांच दल (एसआईटी) के उपाध्यक्ष जस्टिस अरिजित पसायत के अनुसार नोटबंदी के बाद बैंक खातों में जमा हुए धन पर सरकार ने अब तक 6,000 करोड़ रुपए का कर वसूला है. जस्टिस पसायत ने संभावना जताई है कि अभी और राशि कर के रूप में सरकार के खाते में आएगी. उन्होंने यह भी बताया कि कर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बड़ी राशि जमा कराने वाले सरकारी अधिकारियों से सख्ती से पेश आएं और उनकी अघोषित राशि को रिश्वत का पैसा मानते हुए उसे भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत जब्त कर लिया जाए.

कालेधन पर बनी एसआईटी अभी सीबीआई, ईडी, सीबीडीटी सहित अन्य संस्थाओं की कालेधन के खिलाफ मुहिम की निगरानी कर रही है. केंद्र की मोदी सरकार ने आठ नवंबर से 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के चलन को बंद कर दिया था. इसके साथ ही घोषणा की थी कि जिन लोगों के पास अघो​षित आय है, वे करीब 75 फीसदी जुर्माना देकर बच सकते हैं. लिहाजा जवाब—तलब करने के बाद कई लोग जमा की गई राशि पर कर देने को सहमत हो गए. उसी प्रक्रिया से यह राशि इकट्ठा की गई है.

पसायत के मुताबिक नोटबंदी के बाद कर उगाही की मुहिम के पहले चरण में 50 लाख या उससे ज्यादा रकम जमा करने वालों को ईमेल और एसएमएस से नोटिस जारी किया गया था. लोग सजा से बचने के लिए कर और जुर्माना देने को तैयार हो गए थे, जिससे ये धन सरकार के खाते में आ पाया. अभी भी करीब एक हजार लोगों ने नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया है. अनुमान है कि जल्द ही उनसे भी कर राशि वसूल कर ली जाएगी. उनके अनुसार, खातों में बड़ी राशि जमा करने वालों को पिछले तीन साल की बैलेंस शीट और टैक्स रिटर्न पेश करने को कहा गया है.