क्या पद्मावती का दुखांत अब तय है!

पद्मावती के साथ आज वो हो रहा है जो एक जमाने में दीपा मेहता की फायर और वाटर के साथ हमारे देश में हुआ था. उन फिल्मों की ही तरह पद्मावती को भी देश के किसी हिस्से में शूटिंग करने की सहूलियत नहीं मिल रही है. जयपुर के बाद कोल्हापुर में इसका सेट जला दिया गया और इस बार भी यह कारनामा करणी सेना ने अंजाम दिया. दूसरी तरफ राजस्थान की सरकार ने भी पद्मावती के निर्माताओं से सुरक्षा का कोई वादा नहीं किया बल्कि खबरों की मानें तो उल्टे करणी सेना के कर्णधारों से मिलकर उन्हें ये आश्वासन दे दिया कि इस फिल्म की शूटिंग राजस्थान में नहीं होने दी जाएगी. चारों तरफ से आ रहीं इन नकारात्मक खबरों की वजह से फिल्मी गलियारों में अब कहा जाने लगा है कि या तो लंबे वक्त के लिए इस पीरियड फिल्म को होल्ड पर डाल दिया जाएगा, या फिर हमेशा के लिए डिब्बाबंद कर दिया जाएगा.

पद्मावती का बजट शुरू में 150 करोड़ रुपये के आसपास तय हुआ था और तब से लेकर अब तक निर्माता स्टूडियो वायाकॉम इस पर 60 करोड़ खर्च कर चुका है. लेकिन इन पैसों में जितनी फिल्म बननी चाहिए थी उतनी नहीं बन पाई है. वहीं भारत में शूटिंग को लेकर आ रहीं परेशानियों के मद्देनजर भंसाली की टीम दुबई या दूसरे अरब देशों में रेगिस्तान की तलाश कर रही है. लेकिन विदेशी लोकेशन्स पर जाकर शूटिंग करने से पहले से ही बढ़ चुका बजट कई करोड़ और बढ़ जाएगा और वायाकॉम यह खर्चा उठाने के लिए तैयार नहीं है.

दूसरी तरफ रणवीर सिंह के पास जोया अख्तर से लेकर रोहित शेट्टी, कबीर खान तक की फिल्मों के ऑफर हैं और उन्हें अनिश्चित काल तक भंसाली अपने पास नहीं रख सकते. दीपिका के साथ भी यही दुविधा है और भले ही शाहिद के पास अभी कोई फिल्म नहीं है, लेकिन वे भी ज्यादा वक्त तक भंसाली के रतन सिंह बनकर बैठे नहीं रह सकते हैं.

अपनी ही कहानी से निकाले गए चेतन भगत

चेतन भगत ने 2014 में एक नॉवेल लिखी थी जिसका नाम था हाफ गर्लफ्रेंड. यह उनकी छठवीं किताब थी और पिछली किताबों की तरह सिर्फ भविष्य में होने वाले फिल्म एडाप्टेशन को ध्यान में रखकर ही लिखी गई थी. भविष्य यानी 2016 में उनकी इस किताब पर इसी नाम की फिल्म बनने का ऐलान भी हुआ और उसमें अर्जुन कपूर के साथ श्रद्धा कपूर को मुख्य भूमिकाओं के लिए लिया गया. निर्माण एकता कपूर ने संभाला और निर्देशन की जिम्मेदारी मोहित सूरी को दी गई.

अब इन्हीं जनाब मोहित सूरी ने चेतन भगत को उन्हीं की कहानी से बेदखल कर दिया है. ऐसा न समझें कि 3 इडियट्स की तरह भगत को इस बार भी फिल्म में मुख्य लेखक का क्रेडिट नहीं दिया जा रहा है, बल्कि यह समझें कि हाफ गर्लफ्रेंड उपन्यास में चेतन भगत ने खुद को कहानी का सूत्रधार बनाया था जो पाठकों को कहानी नरेट करता था. मोहित सूरी ने यह किरदार फिल्म से हटा दिया है और बड़े परदे पर डेब्यू करने के सपने चुपके-चुपके देख रहे चेतन भगत को हाफ उदास तो कर ही दिया होगा!


‘बॉलीवुड से आप राजनीतिक मसलों पर डटकर बोलने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं. ये कोई एनजीओ नहीं है, यहां पर सिर्फ बिजनेस होता है‘

— कल्कि केकलां

फ्लैशबैक - मन्ना डे के जीवन का वह वाकया जिसकी बदौलत वे नकल करने के बजाय खुद अपनी आवाज को तराश पाए

मन्ना डे के चाचा केसी डे (1983-1962) अपने दौर के नामी संगीतकार थे. हर तरह के क्लासिकल म्यूजिक पर उनकी पकड़ थी और 13 साल की उम्र में हमेशा के लिए अंधे हो जाने वाले इस संगीतकार ने 1930-40 के दशक की कई बंगाली और हिंदी फिल्मों में आलातरीन संगीत दिया था. उन्हें सचिन देव बर्मन के संगीत शिक्षक के तौर पर भी याद किया जाता है और यह सब जानते ही हैं कि जब कोई पुराना शिष्य हिंदी फिल्मों का मशहूर संगीतकार-गायक बन जाता है, तो उस उस्ताद के कई नए शागिर्द उसकी नकल करने लगते हैं.

ऐसे ही एक शागिर्द मन्ना डे थे जिन्होंने फिल्मों में प्रवेश करने से पहले अपने चाचा केसी डे से ही क्लासिकल संगीत की बारीकियां सीखी थीं. उस वक्त उनकी उम्र बीस के आसपास थी और वे सचिन देव बर्मन से बहुत ज्यादा प्रभावित रहा करते थे. एसडी तब तक अपने फिल्मी गीतों की वजह से राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा बन चुके थे और युवा मन्ना डे संगीत की ट्रेनिंग लेते वक्त उनके गीत गाने के तरीके की हूबहू नकल करने लगे थे. अपनी खुद की आवाज तराशने की जगह उन्हें खुद में एसडी बर्मन को तलाशने का जुनून था और जब उनके चाचा व दोनों के ही गुरू केसी डे ने उन्हें ऐसा करते पाया तो जोरदार फटकार लगाई. ‘गाने किसी के भी गाओ, लेकिन अपनी तरह से गाओ’ वाली लंबी नसीहत दी और इसके बाद ही मन्ना डे ने बड़े बर्मन की नकल करना हमेशा के लिए बंद कर दी. अपनी उस मौलिक आवाज को पाने की दिशा में प्रथम कदम भी इसी दौरान आगे बढ़ाया जिसे बाद में समूचे हिंदुस्तान ने अपनाया.

बाद के वर्षों में मन्ना डे ने अपने से 13 साल बड़े एसडी बर्मन के लिए तकरीबन 40 गीत गाए. ‘पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई’ उन्हीं गीतों में से एक है.

Play