उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ का चुनाव कोई अचानक लिया हुआ फैसला नहीं था बल्कि भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने सोच-समझकर और पहले ही उनके नाम पर अपना मानस बना लिया था. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जरूर केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा को मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते थे, लेकिन अंत में इस मसले पर अमित शाह की इंजीनियरिंग ही चली.

द इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव से काफी पहले ही भाजपा अध्यक्ष योगी के पक्ष में मन बना चुके थे. बल्कि वे तो उन्हें मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी के तौर पर भी पेश करना चाहते थे. भाजपा के सूत्र बताते हैं कि पार्टी ने इस सिलसिले में एक अंदरूनी सर्वे कराया था. इसमें सामने आया था कि भाजपा में फिलहाल दो नेता ही हैं जो पूरे राज्य के सभी वर्गों और क्षेत्रों में जबर्दस्त लोकप्रियता और जनाधार रखते हैं. सर्वे में पहला नाम आया, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह का. दूसरा योगी आदित्यनाथ का था.

सूत्र बताते हैं कि इसके बाद शाह ने राजनाथ का मन टटोला. उनसे पूछा कि क्या वे मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी के तौर पर आगे आना चाहेंगे. इस पर राजनाथ से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने साथ ही मशविरा दिया कि पार्टी किसी को मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किए बिना चुनाव में उतरे. पार्टी के कई अन्य शीर्ष नेताओं की भी राय यही थी. सो, योगी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार तो नहीं बनाया गया लेकिन, चुनाव में पार्टी को बहुमत मिलने पर उन्हें सरकार का नेतृत्व सौंपे जाने का मजबूत आधार तैयार हो गया.

पार्टी सूत्र यह भी कहते हैं कि भाजपा अध्यक्ष निजी तौर पर योगी आदित्यनाथ से काफी प्रभावित हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान शाह कुछ दिन आदित्यनाथ के गोरखपुर मठ में रहे थे. उस दौरान उन्होंने योगी की साधारण और अनुशासित जीवनशैली, साफ बात करने की आदत, अपने लोगों का पूरा ख्याल रखने का भाव, इतिहास का ज्ञान आदि हर चीज को नजदीक से देखा. इसका उन पर बहुत असर पड़ा. पूर्वांचल में भाजपा के बागी उम्मीदवारों को हराने और प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान योगी की मेहनत ने भी उन पर प्रभाव छोड़ा.

हालांकि द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की खबर की मानें तो प्रधानमंत्री मोदी अपने मंत्रिमंडल के सहयोगी मनोज सिन्हा की तरफ झुके हुए थे. इसीलिए बीते शनिवार को भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले सिन्हा को दिल्ली से उत्तर प्रदेश रवाना भी कर दिया गया था. बनारस में सिन्हा ने काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना कर ली थी. सिन्हा के नजदीकी सहयोगी एक दिन पहले यानी शुक्रवार को दिल्ली से लखनऊ पहुंच चुके थे. लेकिन उसी वक्त भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने शाह के सामने विरोध कर दिया.

मौर्य ने शाह के सामने यह भी आशंका जताई कि पार्टी विधायक दल की बैठक में भी सिन्हा का विरोध हो सकता है. क्योंकि पार्टी कार्यकर्ताओं में उनकी लोकप्रियता उतनी नहीं है. जबकि योगी के नाम पर किसी को एतराज नहीं होगा. इसके बाद शाह ने तमाम समीकरण ध्यान में रखते हुए आखिरी मौके पर योगी के नाम मुहर लगा दी, जिस पर नरेंद्र मोदी ने भी सहमति दे दी. सूत्र बताते हैं कि योगी के मंत्रियों के चुनाव में भी अमित शाह और केशव प्रसाद मौर्य ने 2019 के चुनाव को ध्यान में रखकर ऐसे ही कई समीकरणों को प्राथमिकता दी है.