क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में समय से पहले चुनाव कराने की तैयारी हो रही है. वैसे, तय समय के हिसाब से यहां इस साल दिसंबर में चुनाव हैं. लेकिन डेक्कन क्रॉनिकल की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब ये जून में हो सकते हैं. पार्टी यहां उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड जैसे अन्य कई राज्यों की तरह ही मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किए बिना चुनाव में उतरेगी.

पार्टी सूत्र बताते हैं कि उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा को मिली ऐतिहासिक जीत से जो माहौल बना है, उसे नेतृत्व हाथ से नहीं जाने देना चाहता. इसीलिए गुजरात में जल्द चुनाव के विकल्प पर विचार हो रहा है. पार्टी के रणनीतिकारों को लगता है कि भाजपा ने दिल्ली में चुनाव कराने में देरी का ही खमियाजा भुगता था और अगर वह वहां लोकसभा चुनाव के वक्त बने माहौल के तुरंत बाद ही चुनाव करा लेती, तो शायद सत्ता में वापसी कर सकती थी. दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी सिर्फ तीन सीटें ही जीत सकी. इसीलिए वह अब इस तरह का कोई जोखिम गुजरात में लेने के मूड में नहीं है.

गुजरात चूंकि प्रधानमंत्री मोदी का गृह राज्य है, इसलिए वहां भाजपा अगर पिछले विधानसभा चुनाव से कम सीटें भी जीतती है तो विरोधियों को निशाना साधने का मौका मिल जाएगा. इस तथ्य के मद्देनजर भी नेतृत्व वहां जल्द चुनाव कराने के पक्ष में है. खबर है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य में 150 सीटें जीतने का लक्ष्य भी तय कर लिया है. राज्य में कुल 182 विधानसभा सीटें हैं. इनमें से इस वक्त भाजपा के पास 123 सीटें हैं. बताया जा रहा है कि राज्य विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को आगे कर के ही चुनाव में उतरेगी. दूसरा बड़ा चेहरा खुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह होंगे.