अमेरिका में खुफिया एजेंसियां और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक अमेरिका की दो खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों ने सार्वजनिक तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आरोप को चुनौती दी है कि 2016 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के निर्देश पर उनके फोन टैप किए गए थे.

फेडरल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन (एफबीआई) के प्रमुख जेम्स कामे और नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी (एनएसए) के निदेशक माइक रोजर्स सोमवार को जनप्रतिनिधि सभा की सतर्कता समिति के सामने गवाही के लिए पेश हुए. फोन टेपिंग के आरोप को लेकर जेम्स कामे ने कहा, ‘पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के निर्देश पर कथित फोन टैपिंग के राष्ट्रपति ट्रंप के ट्वीट का सम्मान करते हुए मैं कहूंगा कि मेरे पास ऐसी कोई सूचना नहीं है जो इसका समर्थन कर सके.’ उन्होंने आगे कहा कि न्याय विभाग ने भी इस आरोप को सही ठहराने वाली कोई सूचना होने से इनकार किया है. एनएसए प्रमुख रोजर्स ने भी कॉमे का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि उनकी संस्था के पास भी इस आरोप को सही ठहराने वाली कोई सूचना नहीं है.

मार्च की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में यह ट्वीट कर विवाद खड़ा कर दिया था कि पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान मैनहट्टन स्थित उनके घर का फोन टैप कराने का निर्देश दिया था. इस पर अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री और ओबामा प्रशासन के समय एफबीआई के प्रमुख रहे लियोन पेनेटा ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप को अपनी गलती मान लेनी चाहिए और राष्ट्रपति ओबामा से माफी मांगनी चाहिए.

सोमवार को सतर्कता समिति के सामने सुनवाई के दौरान बीते साल राष्ट्रपति चुनाव में रूस के कथित दखल की जांच का भी मुद्दा उठा. रिपोर्ट के मुताबिक दोनों खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों ने पहली बार माना कि वे इस मामले की जांच कर रहे हैं. एफबीआई प्रमुख कामे ने अपने उस दावे से पीछे हटने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को महज हराना नहीं चाहते थे, बल्कि वे यह चाहते थे कि डोनाल्ड ट्रंप ही जीतें.