भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपने पांचों सहायक बैंकों के विलय के साथ उनके लगभग आधे कार्यालयों को बंद करने का फैसला किया है. द इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार एसबीआई के प्रबंध निदेशक दिनेश कुमार खारा ने कहा, ‘एसबीआई में विलय प्रक्रिया पूरी होने के बाद पांच सहायक बैंकों में से तीन के मुख्यालयों के साथ इनके 27 जोनल, 81 क्षेत्रीय और 11 नेटवर्क कार्यालयों को भी बंद कर दिया जाएगा.’ उन्होंने कहा कि सहायक बैंकों के विलय की प्रक्रिया 24 अप्रैल तक पूरी हो जाएगी और इसके बाद इनके नियंत्रण कार्यालयों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. एक अप्रैल को बीकानेर और जयपुर स्टेट बैंक, मैसूर स्टेट बैंक, त्रावणकोर स्टेट बैंक, पटियाला स्टेट बैंक और हैदराबाद स्टेट बैंक का एसबीआई में विलय कर दिया जाएगा.

रिपोर्ट के मुताबिक प्रबंध निदेशक खारा ने कहा कि यह कदम नियंत्रण कार्यालयों में दोहराव की समस्या से बचने के लिए उठाया जाएगा. अभी एसबीआई के 550 और सहायक बैंकों के 259 नियंत्रण कार्यालय हैं. लेकिन, विलय के बाद नियंत्रण कार्यालयों की संख्या को 687 तक सीमित करने का लक्ष्य है. इसके लिए सहायक बैंकों के 122 नियंत्रण कार्यालयों को बंद किया जाएगा.

खारा के मुताबिक सहायक बैंकों के नियंत्रण कार्यालयों को बंद करने से इनके 1,107 कर्मचारी प्रभावित होंगे, जिन्हें दूसरी जगह ग्राहक सेवा से जुड़े कार्यों में तैनात किया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि सहायक बैंकों ने उन कर्मचारियों के सामने स्वैच्छिक सेवानिवृत्त योजना (वीआरएस) का प्रस्ताव रखा है जो विलय के बाद दूसरी जगहों पर काम करने के लिए तैयार नहीं हैं.

पिछले महीने केंद्र सरकार ने एसबीआई के पांच सहायक बैंकों के विलय के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया था. इसके बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि इससे बैंकों के बीच तालमेल में सुधार आएगा और परिचालन खर्च भी घट जाएगा. यही नहीं, सहायक बैंकों के विलय के बाद एसबीआई की कुल परिसंपत्ति 37 लाख करोड़ रुपये हो जाएगी. इसके साथ-साथ देश में एसबीआई की शाखाओं और एटीएम की संख्या क्रमशः 22,500 और 58,000 हो जाएगी.