महाराष्ट्र में हिरासत में होने वाली मौतों के मुद्दे पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मंगलवार को लोकसभा में गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि महाराष्ट्र में हिरासत में मौत के मामले दूसरे राज्यों की तुलना में थोड़े से ज्यादा हैं. हिरासत में मौत से जुड़े आंकड़ों को पेश करते हुए उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में 2013 में 35, 2014 में 21 और 2015 में 19 लोगों की मौत हिरासत में मौत हुई.

गृह राज्यमंत्री रिजिजू ने आगे बताया कि देश में हिरासत में होने वाली मौतों की समस्या से निटपने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट के पर्याप्त दिशानिर्देश मौजूद हैं. उनके मुताबिक इन दिशानिर्देशों के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल कार्रवाई की जाती है.

वहीं, करिण रिजिजू के आंकड़ों पर भाजपा सांसद और मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह ने मुंबई पुलिस का बचाव किया. मुंबई और महाराष्ट्र पुलिस को देश की सबसे अच्छी पुलिस बताते हुए उन्होंने कहा कि हिरासत में होने वाली सभी मौतों को पुलिस हिरासत में होने वाली मौत नहीं माना जा सकता. सत्यपाल सिंह के मुताबिक हिरासत में होने वाली ज्यादातर मौतें न्यायिक हिरासत यानी जेल में होती हैं और कुछ मौतें प्राकृतिक होती हैं तो कुछ के लिए बीमारियां जिम्मेदार होती हैं.

हालांकि, सत्यपाल सिंह की बात से दो भाजपा सांसद पूर्व गृह सचिव आरके सिंह और झारखंड पुलिस के पूर्व डीजीपी वीडी राम असहमत दिखाई दिए. उन्होंने इस बारे में कुछ कहना चाहा, लेकिन लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने उन्हें मौका नहीं दिया.