राम मंदिर विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने की सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की सलाह पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं. कुछ लोग इसे कारगर मान रहे हैं तो कुछ लोगों का कहना है कि बीते 27 साल में ऐसी तमाम बातचीत बेनतीजा रही है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक जमीयत उलेमा-ए-हिंद की लीगल सेल के सचिव गुलजार आजमी ने कहा, ‘बातचीत से कोई हल नहीं निकल सकता. अगर ऐसा संभव होता तो मसला बहुत पहले सुलझ गया होता.’ उन्होंने आगे कहा कि अदालत को जमीन के मालिकाना हक पर फैसला करना चाहिए और उसी के आधार पर अपना आदेश सुनाना चाहिए.

वहीं, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने भी ऐसा ही बयान दिया है. उनका कहना है, ‘हम अदालत से बाहर सुलह की बात को नहीं मान सकते. सुब्रमण्यम स्वामी ने जो कहा, उसका कोई मतलब नहीं है, क्योंकि वे इस मामले में पक्षकार ही नहीं हैं.’ पिछली बातचीत क्यों विफल रही, इस सवाल पर जिलानी ने कहा कि हिंदू पक्षकारों के पास एक ही बात थी कि आप मस्जिद से अपना दावा छोड़ दीजिए.

केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने इस सुझाव का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि राम मंदिर को लेकर कोई विवाद नहीं है, बल्कि जमीन के मालिकाना हक का विवाद है, जिस पर मुख्य न्यायाधीश ने सुझाव दिया है. उन्होंने कहा कि इस मामले में मुस्लिम समाज को उदारता दिखानी चाहिए. हालांकि, सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी का कहना है कि जब जमीन के मालिकाना हक का मसला बातचीत से नहीं सुलझा, तब लोग अदालत गए थे, इसलिए अदालत को पहले इस मामले में फैसला सुनाना चाहिए.