केंद्र की सत्ता संभाल रही भारतीय जनता पार्टी ने अब जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. भाजपा राज्य सभा में संख्या बल के संकट से जूझ रही है. उसके पास संसद के उच्च सदन में बहुमत नहीं है. जबकि राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के चुनाव में दोनों सदनों हर सांसद का वोट अहम होता है. संभवत: इसीलिए पार्टी ने तय किया है कि योगी आदित्य नाथ और केशव प्रसाद मौर्य फिलहाल लोकसभा की सदस्यता न छोड़ें. इसी तरह मनोहर पर्रिकर राज्य सभा के सदस्य भी बने रहें.

पांच राज्यों में हाल में ही हुए चुनाव के बाद गोवा में भाजपा को बहुमत नहीं मिला था. वहां महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) ने इसी शर्त पर भाजपा को समर्थन दिया था कि मनोहर पर्रिकर को मुख्यमंत्री बनाया जाए. लिहाजा, भाजपा ने पर्रिकर को रक्षा मंत्री के पद से मुक्त कर गोवा भेज दिया. दूसरी तरफ, ऐतिहासिक बहुमत हासिल करने के बाद पार्टी ने गोरखपुर के सांसद योगी आदित्य नाथ को उत्तर प्रदेश सरकार की कमान सौंपी है. जबकि फूलपुर लोकसभा सीट से जीतने वाले और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य को उत्तर प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है.

नियमों के मुताबिक, योगी, पर्रिकर और मौर्य पर छह महीने तक कोई बंदिश नहीं है. इस दौरान मौजूदा पद संभालते हुए वे संसद सदस्य भी रह सकते हैं. हालांकि इस अवधि में ही उन्हें राज्य विधानसभाओं (उत्तर प्रदेश में विधान परिषद भी) का सदस्य बनना होगा. विधायक चुने जाने के बाद 14 दिन के भीतर संसद से इस्तीफा देना उनके लिए अनिवार्य होगा. भाजपा समयावधि की इसी छूट का फायदा उठाना चाहती है.