देश में शीर्ष पद संभालने वाले अफसरों की कमी बनी हुई है. लोकसभा में दिए गए एक लिखित प्रश्न के जवाब से पता चलता है कि इस वक्त आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अफसरों की कमी के मामले में उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे है. वहां स्वीकृत पदों के मुकाबले 114 आईपीएस कम हैं. और इस कमी के मायने तब काफी अहम हो जाते हैं, जब प्रदेश की नई-नवेली भाजपा सरकार कानून-व्यवस्था की स्थिति दुरुस्त करने में लगी हो.

केंद्रीय कार्मिक प्रशासन और लोक शिकायत मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन को बताया कि उत्तर प्रदेश के बाद आईपीएस अफसरों की कमी मे मामले में पश्चिम बंगाल (88), ओडिशा (79), कर्नाटक (72) और बिहार (43) का नंबर आता है. जहां तक आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अफसरों की कमी का मामला है तो सबसे ज्यादा 128 पद बिहार में खाली हैं. फिर उत्तर प्रदेश में 117 और पश्चिम बंगाल में 101 आईएएस अफसर कम हैं.

उन्होंने बताया कि आईएएस और आईपीएस के स्वीकृत पदों की संख्या देश में क्रमशः 6,396 और 4,802 है. इनमें से आईएएस के 1,470 और और आईपीएस के 908 पद खाली हैं. भारतीय वन सेवा के अफसरों के भी 560 पद खाली हैं. इनमें महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 46, जबकि मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा में 45-45 पद खाली हैं.

इस कमी को दूर करने के बारे में सिंह ने बताया, ‘बीते चार साल से भर्ती परीक्षा में आईएएस अफसरों की संख्या 180 तक बढ़ाई गई है. वहीं, 2009 से आईपीएस और 2015 से वन सेवा के अफसरों की संख्या क्रमशः 150 और 110 तक की गई है. पदोन्नति के जरिए भी खाली पद भरे जा रहे हैं.’

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते कार्मिक, लोक शिकायत और न्याय मामलों की संसदीय समिति ने भी आईएएस अधिकारियों की किल्लत पर चिंता जताई थी. संसद में पेश रिपोर्ट में समिति ने कहा था कि इससे राज्य और केंद्र में प्रशासनिक कुशलता पर असर पड़ रहा है.