महाराष्ट्र में खबर गर्म है कि कांग्रेस के 15 विधायक भाजपा के संपर्क में हैं और इशारा मिलते ही उसका दामन थाम सकते हैं. कांग्रेस के अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 15 विधायक भी भाजपा को समर्थन देने के लिए तैयार हो चुके हैं. अगर ये 30 विधायक भाजपा में शामिल हो गए तो देवेंद्र फड़णवीस सरकार को शिवसेना की मदद की जरूरत नहीं रह जाएगी.

महाराष्ट्र में भाजपा के एक वरिष्ठ मंत्री के करीबी बताते हैं कि देवेंद्र फड़णवीस शिवसेना से अलग होने की पूरी तैयारी कर चुके हैं. इसके बाद दो ही विकल्प बचते हैं – या तो उत्तर प्रदेश में शानदार जीत के बाद महाराष्ट्र में मध्यावधि चुनाव करा लिए जाएं. या फिर एक मिनी चुनाव हो जिसमें कांग्रेस और एनसीपी के विधायक भाजपा की सदस्यता लें और फिर उसके ही टिकट पर चुनाव लड़ें.

दूसरा विकल्प चुनने की हालत में भाजपा को पूरे महाराष्ट्र की जगह सिर्फ 30 विधानसभा सीटों पर ही चुनाव लड़ना पड़ेगा. भाजपा के नेताओं को भरोसा है कि यह लघु चुनाव वे आसानी से जीत सकते हैं. सुनी-सुनाई से कुछ ज्यादा है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से बात भी कर ली है. दिल्ली के नेताओं की राय भी यही है कि फिलहाल मध्यावधि चुनाव के बजाय सिर्फ 30 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला ज्यादा सही रहेगा. अगर ऐसा हुआ तो निकट भविष्य में गुजरात के साथ-साथ महाराष्ट्र में भी भाजपा को इम्तिहान देना होगा.

दरअसल पिछले कुछ महीने में भाजपा और शिवसेना के रिश्तों में ऐसी दरार आ चुकी है जिसे पाटना मुश्किल है. समस्या बस एक है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बार-बार भाजपा नेतृत्व को ताकीद करता रहता है कि शिवसेना भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी है इसलिए उसे छोड़ना विचारधारा पर चलने वाले ज्यादातर स्वयंसेवकों को पसंद नहीं आएगा.

बीएमसी चुनाव में भी संघ के दबाव में ही भाजपा ने अपना मेयर बनाने के बजाय शिवसेना के उम्मीदवार को समर्थन दिया था. महाराष्ट्र भाजपा के एक नेता बताते हैं कि अगर पार्टी चाहती तो आसानी से अपना मेयर चुन सकती थी. देवेंद्र फड़णवीस मुंबई में पहली बार भाजपा का मेयर स्थापित भी करना चाहते थे, लेकिन नागपुर ने इस प्रस्ताव को वीटो कर दिया.

ऐसा नहीं है कि भाजपा ही ऐसा करना चाहती है. उल्टे भाजपा के राज्य नेतृत्व को खबर लगी है कि शिवसेना किसी मुद्दे को आधार बनाकर सरकार से अलग होना चाहती है ताकि महाराष्ट्र में मध्यावधि चुनाव हो. शिवसेना ऐसा करे इससे पहले भाजपा ही खुद को बचाने की तैयारी में जुट गई है. इसलिए पिछले दो हफ्तों में भाजपा नेता लगातार कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायकों से संपर्क साध रहे हैं.

महाराष्ट्र में विधानसभा की 288 सीटें हैं और बहुमत के लिए किसी भी पार्टी को 145 विधायकों की जरूरत है. भाजपा के पास अपने दम पर 122 विधायक हैं. ऐसे में अगर भाजपा कांग्रेस और एनसीपी के तीस विधायकों को अपने पाले में ले आती है तो उसकी सरकार पर से खतरा टल जाएगा. भाजपा के प्रदेश नेतृत्व को भरोसा है कि अगर इसी साल चुनाव हो गए तो इन 30 सीटों में से वो कम से 25 सीटें जीत सकती है.

यह मिनी चुनाव एक रिस्क है, लेकिन भाजपा का शिवसेना के बीच चल रहा खट्टा-मीठा इश्क भी कम खतरनाक नहीं है. अगर अपने दम पर भाजपा ने सरकार बना ली तो खुल्लमखुल्ला वार होगा. अभी तो न खुल्लमखुल्ला वार कर सकते हैं, और प्यार का तो सवाल ही पैदा नहीं होता.