भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जा रही टेस्ट सीरीज लगभग वैसी ही हो रही है जैसी इससे पहले होती रही हैं. कहा जाता है कि इन दोनों टीमों के बीच मैदान के साथ-साथ मैदान से बाहर भी मैच जारी रहता है. दोनों खेमे एक-दूसरे पर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश में लगे रहते हैं. इस बार दोनों देशों के वर्तमान और पूर्व खिलाड़ियों के साथ-साथ मीडिया ने भी ऐसा करने में बड़ी भूमिका निभाई है. सीरीज का चौथा और निर्णायक टेस्ट मैच धर्मशाला में शुरू हो गया है. हमेशा की तरह इस मैच से पहले भी दोनों टीमों ने एक-दूसरे पर मानसिक दबाव बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ा.

हालांकि, अगर आंकड़ों को देखें तो यह निर्णायक मैच धर्मशाला में होना ही ऑस्ट्रेलिया को मानसिक तौर मजबूती देता दिख रहा है. दिग्गज क्रिकेट विश्लेषक ग्लेन मिचेल कहते हैं, ‘यह मैच धर्मशाला में होना ही ऑस्ट्रेलिया की मनचाही मुराद पूरी होने जैसा है. भारतीय सरजमीं पर अगर कोई टेस्ट सीरीज 1-1 से बराबरी पर हो तो निर्णायक मैच के लिए ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड जैसी टीमों की यही इच्छा होगी कि वह मैच धर्मशाला में आयोजित हो.’ वे आगे कहते हैं कि भारत में इस समय एकमात्र धर्मशाला की ही पिच ऐसी है जो तेज गेंदबाजों की मददगार है साथ ही यहां का वातावरण पर्थ और एडिलेड से काफी हद तक मिलता-जुलता है.

शनिवार से शुरू हुआ टेस्ट सीरीज का अंतिम मैच धर्मशाला में होने वाला पहला अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच भी है. इससे पहले तक यहां चार दिवसीय रणजी मैच ही खेले गए हैं जिनमें तेज गेंदबाज की हावी रहे हैं. पिछले रणजी सत्र में यहां खेले गए तीन मैचों के दौरान गिरने वाले 101 विकेटों में से 87 फीसदी यानी 88 विकेट तेज गेंदबाजों ने झटके थे. इन मैचों में गेंदबाजों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को देखें तो बीते अक्टूबर में बंगाल के तेज गेंदबाज अशोक डिंडा ने रेलवे के खिलाफ हुए मैच में 10 विकेट लिए थे, जबकि इसी मैच में रेलवे की ओर से लेग स्पिनर करन शर्मा को मात्र एक विकेट से ही संतोष करना पड़ा था. कम स्कोर वाले इस मैच में रेलवे पहली पारी में 105 रन ही बना सकी थी.

इसके बाद दिसंबर में मध्यप्रदेश और बड़ोदा के बीच हुए एक चार दिवसीय मैच में भी कुछ ऐसी ही तस्वीर दिखी थी. इस मैच में मध्यप्रदेश की ओर से तेज गेंदबाज ईश्वर पाण्डेय ने कुल सात विकेट लेकर बड़ोदा की कमर तोड़ दी थी. इस मैच की अंतिम पारी में बड़ोदा की पूरी टीम 347 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए महज 114 रन पर सिमट गई थी.

इस मैच से पहले आई पिच क्यूरेटर की रिपोर्ट भी ऑस्ट्रेलिया को खुश करने वाली है, इसके मुताबिक पिच तेज गेंदबाजों की मददगार होगी और इस पर अतिरिक्त उछाल भी प्राप्त होगा  

इन रणजी मैचों में पहले मैच को छोड़कर सभी कम स्कोर वाले रहे थे. हालांकि, पहले मैच में भी केवल पहली दो पारियों में ही बड़े स्कोर बन सके थे. इस मैच की तीन पारियों का स्कोर 524, 480 और 114 था. इसके बाद हुए दूसरे मैच की चार पारियों का स्कोर 205, 105, 214 और 271 रन जबकि, तीसरे मैच की पारियों का स्कोर 217, 164, 293 और 114 रन रहा था.

धर्मशाला में इससे पहले तक आठ अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच भी खेले गए हैं और इनमें भी तेज गेंदबाज ही हावी रहे थे. पिछले साल टी20 विश्वकप के एक बेहद रोमांचक मुकाबले में न्यूजीलैंड ने अपने तेज गेंदबाजों के दम पर ऑस्ट्रेलिया को 142 रन का स्कोर भी हासिल नहीं करने दिया था. इस मैच में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज मिचेल मैकलेंग़न ने 3 और कोरी एंडरसन ने 2 विकेट लिए थे. 2013 के बाद से इस मैदान पर खेले गए तीन वनडे मैचों में कुल गिरे 43 विकटों में से 24 तेज गेंदबाजों ने ही लिए हैं.

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले जा रहे टेस्ट मैच से पहले आई पिच क्यूरेटर सुनील चौहान की रिपोर्ट भी जहां ऑस्ट्रेलिया को खुश करने वाली है, वहीं इसने भारतीय टीम की चिंताएं बढ़ा दी हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक पिच तेज गेंदबाजों के लिए मददगार साबित होगी और इस पर अतिरिक्त उछाल भी प्राप्त होगा. हालांकि, चौहान को विश्वास है कि इस पिच पर मैच पांच दिनों तक चलेगा.

धर्मशाला की पिच और वहां की परिस्थितियों को देखने से साफ़ पता चलता है कि इस निर्णायक मैच में दबाव भारतीय टीम पर ही है. उसके बल्लेबाजों के सामने सबसे बड़ी समस्या मिचेल स्टार्क, जोश हेजलवुड और पिछले मैच में चार विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज पैट कमिंस से निपटने की होगी. हालांकि, भारतीय टीम के साथ-साथ यह मैच खुद धर्मशाला के लिए भी किसी परीक्षा से कम नहीं है. इसमें कोई शक नहीं कि इस सीरीज के इस निर्णायक टेस्ट मैच में पिच का बर्ताव ही टेस्ट क्रिकेट में उसके भविष्य का निर्णय करने वाला है.