भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ को जल्दी ही यह चुनाव करना पड़ेगा कि बतौर कोच वे बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) के साथ रहें या फिर आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) में. द्रविड़ इस वक्त भारत की अंडर-19 टीम के कोच हैं और आईपीएल की दिल्ली डेयरडेविल्स टीम के मेंटर भी. लेकिन अब बीसीसीआई के सूत्रों के हवाले से द इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी है कि बोर्ड की प्रशासनिक समिति (सीओए) नए नियम लागू कर रही है जिसके बाद किसी को भी ऐसे दो पद अपने पास रखने की इजाजत नहीं होगी.

अखबार के मुताबिक नए नियमों के तहत सीओए अपने सभी कोच, टीम के सपोर्ट स्टाफ और फिजियो थैरेपिस्ट आदि के लिए 12 महीने के अनुबंध का प्रावधान करने जा रही है. इसके बाद अनुबंध की समयावधि में वे कहीं कोई और लाभ का पद नहीं ले सकेंगे. मौजूदा नियमों के तहत इन सभी को यह सुविधा मिली हुई है कि वे 10 महीने तो बोर्ड के साथ अनुबंधित रहेंगे और बाकी दो महीने वे आईपीएल की किसी फ्रेंचाइजी को भी अपनी सेवाएं दे सकते हैं. लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त सीओए को लगता है कि इस व्यवस्था से हितों के टकराव का मामला बनता है. लिहाजा, उसे रोकने के लिए नए नियम लागू किए जा रहे हैं.

इन नए नियमों का असर सिर्फ राहुल द्रविड़ पर ही नहीं, अन्य कई लोगों पर भी पड़ने वाला है. इनमें सीनियर टीम के बैटिंग कोच संजय बांगड़, फील्डिंग कोच आर श्रीधर, चीफ फिजियो एंड्रयू लीपस और फिजियोथैरेपिस्ट पैट्रिक फैरहर्ट शामिल हैं. इनमें श्रीधर किंग्स इलेवन पंजाब, लीपस कोलकाता नाइट राइडर्स और फैरहर्ट मुंबई इंडियंस से जुड़े हुए हैं. सूत्रों के मुताबिक, द्रविड़ को नए नियमों के तहत काम करने में दिक्कत नहीं है. बीसीसीआई के साथ 12 महीनों के अनुबंध की शर्ताें में बदलाव की जरूरत जरूर उन्हें महसूस हो रही है. उन्हें बोर्ड की तरफ से सालाना 2.62 करोड़ रुपए का भुगतान होता है जबकि बांगड़ और श्रीधर को एक से डेढ़ करोड़ रुपए मिलते हैं.

एक सूत्र ने बताया, ‘आईपीएल से उन्हें (द्रविड़ या अन्य को) जो मिल रहा है उसका भुगतान हम (बोर्ड) करेंगे. इसके बदले में उनकी जिम्मेदारियां बढ़ाई जा सकती हैं. जैसे, एनसीए (नेशनल क्रिकेट अकादमी) में आईपीएल के दौरान क्षेत्रीय स्तर पर प्रशिक्षण शिविर लगते हैं. उन्हें वहां तैनात किया जा सकता है.’