देश में डोपिंग (खेल के दौरान दमखम बढ़ाने के लिए प्रतिबंधित दवाओं का सेवन) को जल्द ही अपराध करार दिया जा सकता है. संबंधित कानून में खिलाड़ियों को ही नहीं, प्रशिक्षकों और प्रतिबंधित दवाओं के निर्माता व आपूर्तिकर्ताओं के लिए भी सजा का प्रावधान हो सकता है. यहीं पर यह बताना जरूरी है कि वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) के मुताबिक, भारत दुनिया में तीसरा ऐसा देश है, जहां खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा डोपिंग का दोषी पाया जाता है. इसीके मद्देनजर सरकार अब इस दिशा में सख्ती बरतने वाली है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, केंद्रीय खेल मंत्रालय ने विधेयक तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सहमति दे दी है. इस सिलसिले में नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) के महानिदेशक नवीन अग्रवाल ने बताया, ‘मंत्रालय से मंजूरी मिलते ही हमने विधेयक का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. हम जल्द ही इस मसौदे को खेल मंत्रालय को वापस भेजेंगे. वहां से मंजूरी के बाद इसे कानून मंत्रालय के पास भेजा जाएगा. इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल की मुहर लगते ही संसद में पेश कर दिया जाएगा. इस तरह कानून बनने की प्रक्रिया में छह महीने तक लग सकते हैं.’

अग्रवाल कहते हैं, ‘मादक पदार्थों का उपयोग, संग्रह और व्यापार, आदि को कानूनन अपराध माना जाता है. हम चाहते हैं कि उसी तरह के प्रावधान खेलों में दम-खम बढ़ाने वाली दवाओं के संबंध में भी हों. इसकी वजह ये है कि जिस तरह मादक पदार्थ किसी की मानसिक अवस्था को बदल देते हैं, उसी तरह दम-खम बढ़ाने वाले पदार्थ शारीरिक स्थिति को बदलते हैं. दोनों ही शरीर के लिए हानिकारक हैं.’ बता दें कि वाडा के नियमों के मुताबिक, पहली बार डोपिंग का दोषी पाए जाने पर किसी खिलाड़ी पर चार साल का प्रतिबंध लगता है. जबकि दूसरी बार दोषी पाए जाने पर आठ साल का प्रतिबंध लग जाता है.