यूरोपीय संघ से अलग होने यानी ब्रेक्जिट की प्रक्रिया शुरू करने से कुछ घंटे पहले ब्रिटेन के लिए स्कॉटलैंड की संसद से परेशान करने वाली खबर आई है. खबरों के मुताबिक मंगलवार को स्कॉटलैंड की संसद में 59 के मुकाबले 69 मतों से आजादी पर दूसरी बार जनमत संग्रह कराने के लिए ब्रिटेन से निवेदन करने की योजना को मंजूरी मिल गई है. इसे ब्रेक्जिट की प्रक्रिया पूरी होने से पहले कराया जाना है.

इस मौके पर स्कॉटलैंड की प्रथम मंत्री (स्कॉटलैंड सरकार का मुखिया) निकोला स्टरजन ने कहा है कि ब्रेक्जिट से पहले स्कॉटलैंड के नागरिकों को अपने भविष्य के बारे में फैसला करने का मौका मिलना चाहिए. स्कॉटलैंड की संसद में मतदान से पहले उन्होंने कहा था, ‘स्कॉटलैंड का भविष्य स्कॉटलैंड के हाथों में होना चाहिए.’ बीते साल ब्रेक्जिट पर जनमत संग्रह में स्कॉटलैंड के लोगों ने यूरोपीय संघ में बने रहने का समर्थन किया था.

स्कॉटलैंड की आजादी पर 2014 में भी एक जनमत संग्रह कराया गया था, जिसमें जनता ने इस मांग को खारिज कर दिया था. हालांकि, निकोला स्टरजन का कहना है कि ब्रेक्जिट की वजह से मौजूदा स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. उन्होंने यह भी कहा कि स्कॉटलैंड की आजादी पर दूसरा जनमत संग्रह 2018 और 2019 के बीच कराना जाना चाहिए, तब तक ब्रेक्जिट की ज्यादातर शर्तें साफ हो जाएंगी.

हालांकि, स्कॉटलैंड की ओर से यह मांग उस ऐतिहासिक दिन से ठीक पहले आई है जब ब्रिटेन यूरोपीय संघ से दशकों पुराना रिश्ता तोड़ने की प्रक्रिया को शुरू करने जा रहा है. ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे बुधवार को लिस्बन संधि की यूरोपीय संघ से अलग होने की धारा-50 को प्रभावी बनाने जा रही हैं. इस प्रक्रिया को पूरा होने में कम से कम दो साल लगेंगे.