कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन लगातार विवादों में बने हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट के जजों की अवमानना के मामले में वे शुक्रवार को शीर्ष अदालत की सात जजों की बेंच के सामने पेश तो हुए लेकिन अपनी बात पर अड़े रहे. उल्टा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जेएस खेहर और उनके साथ बेंच के अन्य छह सदस्य जजों के खिलाफ ही शीर्ष अदालत के रजिस्ट्रार को आदेश दे गए, ‘इन सभी का काम छीन लिया जाए. क्योंकि ये लोग मेरे आदेश की अवहेलना कर रहे हैं.’

दरअसल, जस्टिस कर्णन ने देश के 20 जजों के खिलाफ गंभीर कदाचरण और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. इसी मामले में शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ अवमानना के मामले में सुनवाई शुरू की है. उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया गया. लेकिन वे पेश नहीं हुए. हालांकि शुक्रवार को नियत सुनवाई के वक्त वे अदालत में आए. इस दौरान उनकी चीफ जस्टिस खेहर सहित बेंच के सदस्य जजों से गर्मागर्म बहस हुई. अंत में जस्टिस कर्णन खुद सुनवाई बीच में छोड़कर चले गए. जाते-जाते सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को भी आदेश दे गए.

करीब 50 मिनट चली सुनवाई के दौरान किसने-क्या कहा :

जस्टिस कर्णन : मेरा काम मुझे वापस नहीं दिया गया, तो कोर्ट में नहीं आऊंगा, भले जेल भेज दें  

‘अगर मेरा काम फिर मुझे वापस नहीं दिया गया तो मैं कोर्ट में नहीं आऊंगा. भले मुझे आप जेल भेज दें. कोर्ट ने मेरे खिलाफ अंसवैधानिक फैसला लिया है. मैं कोई आतंकी नहीं हूं. मैंने जजों के खिलाफ जो शिकायत की वे कानून के दायरे में हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मेरा काम छीन लिया. इससे मेरा मानसिक संतुलन गड़बड़ा गया है. मेरा सामाजिक बहिष्कार हो गया है. यहां तक कि मेरी प्रतिष्ठा भी चली गई है. अब अगर मेरा काम मुझे वापस दिया जाएगा, तभी मैं कोर्ट को जवाब दूंगा.’

(शीर्ष अदालत ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए फरवरी में जस्टिस कर्णन से सभी न्यायिक और प्रशासनिक काम छीन लिए थे.)  

सुप्रीम कोर्ट : अगर आप मानसिक रूप से बीमार हैं, तो प्रमाण पत्र दें या चार हफ्ते में जवाब   

‘अगर आप मानसिक रूप से बीमार हैं तो अदालत में इसका प्रमाण पत्र दें. जज होने के बावजूद आपको कानूनी प्रक्रिया नहीं पता. हमने आपको जमानती वारंट जारी किए. आरोपी के तौर पर नहीं बल्कि आपका पक्ष जानने के लिए नोटिस दिया. लेकिन आप कोर्ट नहीं आए. अब आप चार हफ्ते में हलफनामा देकर दो सवालों के जवाब दें. पहला- क्या आप 20 जजों के खिलाफ लगाए आरोपों को सही मानने को तैयार हैं? दूसरा- या फिर शिकायत वापस लेकर कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगने को राजी हैं?’

(सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल जस्टिस कर्णन के न्यायिक और प्रशासनिक कामों पर लगी रोक को हटाने से भी इनकार कर दिया है.)