भारत के बाहर रोजगार पाने की इच्छा रखने वालों के लिए अमेरिका और ब्रिटेन से बुरी खबर आई है. अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा व्यवस्था का दुरुपयोग रोकने के लिए कदम उठाए हैं तो ब्रिटेन ने भी गैर-यूरोपीय कर्मचारियों पर निर्भरता घटाने के लिए वीजा शर्तों को सख्त बना दिया है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक एच-1बी वीजा जारी करने के लिए जिम्मेदार यूएस सिटिजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है. इसमें एच-1बी वीजा जारी करते समय नियमों के सख्ती से पालन करने की बात कही गई है. इसके तहत आवेदकों से उनकी योग्यता को लेकर और भी पुख्ता साक्ष्यों और कागजात की मांग की जाएगी. अमेरिका में यह नियम बीते दो दशक से लागू है, लेकिन काफी समय से इसको लेकर सख्ती खत्म हो गई थी, जिससे उन लोगों को भी वीजा मिल जा रहा था जिनके पास जरूरी कौशल या योग्यता नहीं होती थी.

वहीं, न्याय विभाग ने एच-1बी वीजा की मांग करने वाले नियोक्ताओं को चेतावनी दी है कि अगर रोजगार देने में वे अमेरिकियों के साथ भेदभाव करते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कदम उठाया जाएगा. इन दोनों घोषणाओं को आउससोर्सिंग कंपनियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. अमेरिका हर साल 85,000 एच-1बी वीजा जारी करता है, जिसका आधा भारतीय आईटी इंजीनियरों के खाते में आता रहा है. अमेरिकी प्रशासन के इस नए रुख से हजारों भारतीयों के प्रभावित होने का अनुमान है.

उधर, ब्रिटेन ने भी वीजा नियमों को सख्त कर दिया है जिसका भारतीयों पर काफी बड़ा असर पड़ेगा. हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार ब्रिटेन द्वारा बदली गई वीजा शर्तों में 1,000 पाउंड के इमिग्रेशन स्किल्स चार्ज, वेतन की ऊपरी सीमा में बढ़ोतरी और स्वास्थ्य सरचार्ज लगाने जैसे कदम शामिल हैं. इससे नियोक्ताओं के लिए टियर-2 वीजा काफी महंगा हो जाएगा. छह अप्रैल से लागू होने वाली ये सभी शर्तें इंट्रा-कंपनी ट्रांसफर (आईसीटी) वीजा पर भी लागू होंगी जो ज्यादातर भारतीय आईटी और अन्य कंपनियों को मिलता है ताकि वे अपने कर्मचारियों का ब्रिटेन तबादला कर सकें.