अमेरिका की प्रतिष्ठित ‘स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी’ प्रतियोगिता भारतीय मूल के छात्रों ने एक बार फिर से जीत ली है. अंग्रेजी के शब्दों का ज्ञान जांचने वाली इस प्रतियोगिता में 13 वर्षीय वन्या शिवशंकर और 14 वर्षीय गोकुल वेंकटचलम को संयुक्त विजेता घोषित किया गया. यह भी संयोग ही है कि पिछले साल भी इस प्रतियोगिता के दो संयुक्त विजेता थे और दोनों भारतीय मूल के थे. इससे पहले पिछले 52 साल से कोई इस प्रतियोगिता में संयुक्ता विजेता नहीं बना था. स्पेलिंग बी के नाम से दुनिया भर में मशहूर इस प्रतियोगिता में लाखों छात्र हिस्सा लेते हैं. बीते सालों की तरह इस बार भी इसमें भारतीय छात्रों का दबदबा देखने को मिला. फाइनल तक पहुंचने वाले दस छात्रों में से सात और सेमीफाइनल तक पहुंचे 49 छात्रों में से 25 भारतीय मूल के थे. दोनों विजेता बच्चे आठवीं कक्षा के छात्र हैं. विजेताओं को ईनाम के तौर पर 35 हजार डॉलर नगद (करीब 23 लाख रुपए), 2500 डॉलर के बांड्स और कई शैक्षिक संस्थाओं की सदस्यता सहित बहुत से उपहार दिए गए.
पिछले साल भी इस प्रतियोगिता के दो संयुक्त विजेता थे और दोनों भारतीय मूल के थे
अमेरिका में राष्ट्रीय स्तर की यह प्रतियोगिता “स्क्रिप्स कम्पनी” द्वारा हर साल आयोजित करायी जाती है. इस प्रतियोगिता में चौथी से आठवीं क्लास के छात्र हिस्सा ले सकते हैं. यह लगातार आठवां साल है जब यह प्रतियोगिता भारतवंशी बच्चों ने जीती है. खबरों के अनुसार, पिछले 16 सालों में यह भारतीय मूल के अमेरिकावासियों को मिली 13वीं जीत है. इस प्रतियोगिता में भारतीयों की जीत को लेकर सोशल मीडिया पर कई नस्लभेदी टिप्पणियां भी देखने को मिली थी. कुछ ने स्पेलिंग बी में सिर्फ अमेरिकी मूल के बच्चों के भाग लेने की बात कही थी. इसके बाद प्रतियोगिता का आयोजन कराने वाली संस्था के निदेशक पेज किंबल ने इस पर अफसोस जताते हुए कहा था कि प्रतियोगिता में प्रतिभा मायने रखती है और किसी के मूल से कोई फर्क नहीं पड़ता.
बांग्लादेश को मोदी की यात्रा के दौरान तीस्ता समझौते की उम्मीद
बांग्लादेश ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी यात्रा के दौरान बहुप्रतीक्षित तीस्ता नदी जल बंटवारा समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद जताई है. भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त सैय्यद मुअज्जम अली ने कहा, 'मैं तीस्ता समझौते के बारे में सकारात्मक सोच रखता हूं. अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति होगी तो इस समझौते पर जरूर हस्ताक्षर होंगे.' इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार के बीच बातचीत चल रही है और बांग्लादेश को उम्मीद है कि इसके कुछ सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे. अली ने कहा कि मोदी ने भूमि सीमा समझौते को संसद में निर्विरोध पारित करा कर शानदार काम किया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय प्रधानमंत्री के इस दौरे से सभी लंबित मुद्दों पर बात आगे बढ़ेगी. उन्होंने अन्य प्रस्तावों का जिक्र करते हुए कहा कि ढाका और कोलकाता के बीच चलने वाली मैत्री एक्सप्रेस में ही सीमा शुल्क और आव्रजन की औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए भी एक प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है. साथ ही नेपाल और चटगांव के बीच रेल मार्ग भी बांग्लादेश के एजेंडे में है.  नरेंद्र मोदी छह जून को बांग्लादेश की दो दिन की यात्रा पर जा रहे हैं. यात्रा पर उनके साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी होंगी.
58 प्रतिशत अमेरिकी ड्रोन हमलों का समर्थन करते हैं
अमेरिका के बड़े थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में 58 फीसदी अमेरिकी नागरिकों ने पाकिस्तान, यमन और सोमालिया जैसे देशों में चरमपंथियों पर ड्रोन हमलों को सही करार दिया. जबकि 35 फीसदी लोगों ने इसे अस्वीकार कर दिया. 12 से 18 मई के बीच किए गए इस टेलीफोनिक सर्वे में 50 राज्यों के 2002 अमेरिकी नागरिकों ने हिस्सा लिया था. इससे पहले 2013 में किए गए सर्वे में करीब 56 फीसदी लोगों ने ड्रोन हमलों का समर्थन किया था और सिर्फ 26 फीसदी लोगों ने इसका विरोध किया था. अगर ड्रोन हमलों पर अमेरिका की दोनों प्रमुख पार्टियों के रुख की बात करें तो सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी के सिर्फ 52 फीसदी समर्थक इसका समर्थन करते हैं जबकि विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी के 74 फीसदी समर्थक ऐसा करते हैं.
इसी साल जनवरी में अमेरिका द्वारा पाकिस्तान में अलकायदा के ठिकानों पर किए ड्रोन हमलों में अल कायदा के दो बंधक - अमेरिकी नागरिक वॉरेन वेन्सटाइन और इतालवी सामाजिक कार्यकर्ता जोवानी लो पोर्तो - भी मारे गए थे. इनकी मौत के बाद से अमेरिका में ड्रोन हमलों को लेकर बहस छिड़ गई थी. 2009 में बराक ओबामा के राष्ट्रपति बनने के बाद से अमेरिकी ड्रोन हमलों में तेजी आई है. ओबामा का मानना है कि इन हमलों से बड़ी संख्या में पाकिस्तान के बलूचिस्तान और अन्य इलाको में छिपे आतंकी मारे जा रहे हैं. उधर अमेरिका औऱ बाहर के कई मानवाधिकार समूह और क़ानूनविद इन हमलों को गैर कानूनी और अनैतिक बताते हैं. उनका कहना है, इन हमलों में बड़ी संख्या में निर्दोष लोग भी मारे जा रहे हैं.