इस गांव में भरी दोपहर प्रधानमंत्री बकरियां चराते और राष्ट्रपति खेतों में पानी देते नजर आते हैं. राज्यपाल कंचे खेलते हैं तो एक टूटी बंदूक के लिए कलेक्टर आपस में भिड़े रहते हैं. रामनगर नाम का यह अनोखा गांव राजस्थान के बूंदी जिले में स्थित है.

रामनगर को अनोखा कंजर समुदाय की वह आबादी बनाती है जो अपने बच्चों के नाम सरकारी पदों, संस्थाओं और हस्तियों के नाम पर रखती है. ये लोग ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं होते लेकिन, बच्चों को नाम देते समय वे सारी कसर पूरी कर लेते हैं.

इस अजीब रिवाज के पीछे जुड़ी कहानी भी कम अनूठी नहीं है. बताया जाता है कि तकरीबन 50 साल पहले तत्कालीन जिला-कलेक्टर गांव का मुआयना करने आए. उनके रूतबे से गांव की एक वृद्ध महिला इतनी प्रभावित हुई कि वह अपने पोते को कलेक्टर नाम से ही बुलाने लगी. बस फिर क्या था! तभी से इन लोगों ने अपने बच्चों को इस तरह के नाम देने की रीत बना ली. हालांकि यह बात और है कि 50 साल का यह कलेक्टर कभी स्कूल नहीं गया.

एक स्थानीय सरकारी अध्यापक बताते हैं कि इस समुदाय के अधिकतर लोग अापराधिक गतिविधियों में लिप्त रहते थे. इसके चलते उन्हें आए दिन थाने और कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते. इस दौरान वे प्रशासनिक अधिकारियों को मिलने वाली तवज्जो और अधिकारों से खासे प्रभावित होते. गांव लौटने पर उन्होंने अपने बच्चों के नाम उन्हीं अधिकारियों के पदों की तर्ज पर रखना शुरु कर दिया. इस गांव में सबसे ज्यादा बच्चे- आईजी, एसपी, हवलदार और जज साहब नाम के पाए जाते हैं.

गांव में हाईकोर्ट नाम का भी एक व्यक्ति रहता है. कहते हैं कि जब उसका जन्म हुआ तो उसके दादा को हाईकोर्ट ने एक मामले में जमानत दी थी. बस फिर क्या था, उस बच्चे का नाम हाईकोर्ट रख दिया गया. यही नहीं, गांव के एक परिवार को कांग्रेस से खासा लगाव है. जाहिर है कि उस घर के बच्चों के नाम सोनिया, राहुल और प्रियंका रखे गए हैं.

रामनगर की तरह बूंदी के ही एक दूसरे गांव नैनवा में भी बच्चों को अजीबोगरीब नाम दिए जाते हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि यहां के लोग प्रशासन की बजाय उन्नत तकनीकों के कायल हैं. यहां रहने वाले मौंगिया और बंजारा समुदाय के लोगों ने अपने बच्चों के नाम मोबाइल ब्रांड और एसेसरीज पर रखे हैं. यही कारण हैं कि यहां सिम कार्ड को पेड़ों से झूलते और मिस-कॉल को अक्सर हाथों में गुलेल लिए इमलियां तोड़ते देखा जा सकता है.