अमेरिका की तर्ज पर बेरोजगारी से निपटने के लिए अब ऑस्ट्रेलिया ने भी विदेशी कामगारों पर पाबंदियां लगानी शुरू कर दी हैं. आस्ट्रेलिया सरकार चाहती है कि स्थानीय नौकरियों में उसके नागरिकों को प्राथमिकता मिले. इसके लिए ऑस्ट्रेलिया ने मंगलवार को विदेशियों के बीच लोकप्रिय ‘457’ वीजा कार्यक्रम बंद कर दिया. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैलकम टर्नबुल ने कहा है, ‘हम एक प्रवासी राष्ट्र हैं, लेकिन सच्चाई यह भी है कि ऑस्ट्रेलिया के भीतर रोजगार में देश के लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.’

इस फैसले से सबसे ज्यादा भारतीय प्रभावित होने वाले हैं, क्योंकि ‘457’ वीजा कार्यक्रम के तहत वीजा पाने वालों में भारतीयों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. बीते साल 30 सितंबर तक इस वीजा कार्यक्रम के तहत ऑस्ट्रेलिया में 95,000 अस्थायी प्रवासी कार्मिक थे, जिनमें भारतीयों की संख्या 26.8 फीसदी थी, जो किसी भी अन्य देश या समूह की तुलना में सबसे ज्यादा है.

ऑस्ट्रेलिया ने 457 वीजा कार्यक्रम नब्बे के दशक में पेशेवरों और उच्च कौशल वाले प्रवासियों को आकर्षित करने के लिए शुरू किया था. इसके तहत कुशल प्रवासी कार्मिकों को अधिकतम चार साल के लिए नियुक्त किया जाता था. हालांकि बाद में नियोक्ताओं पर ये आरोप लगने लगे कि वे इस वीजा कार्यक्रम का दुरुपयोग कर कम वेतन पर प्रवासी कार्मिकों को नियुक्त करते हैं. इसके बाद से यह विवादों में आ गया था. इसी वजह से प्रधानमंत्री मेलकम टर्नबुल ने कहा है कि अब इसकी कोई साख नहीं बची है, इसलिए अब इसके जरिए ऑस्ट्रेलियाई लोगों की नौकरियों को विदेश भेजने की और छूट नहीं दी जा सकती.

हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने इसकी जगह पर दूसरा वीजा कार्यक्रम लाए जाने की बात कही है जिसके तहत ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के लिए भी रोजगार के अवसर बने रहेंगे. एनडीटीवी के अनुसार नए वीजा कार्यक्रम के तहत प्रवासी कार्मिकों को दो या चार साल का वर्क वीजा दिया जाएगा. यह उन लोगों को जारी किया जाएगा, जिनके पास दो साल के अनुभव के साथ अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ होगी.