दिल्ली में एक सीट पर विधानसभा उपचुनाव हारने की बड़ी कीमत मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चुकानी पड़ सकती है. केजरीवाल की पार्टी में बगावत के सुर साफ सुनाई दे रहे हैं. इस बार पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास के बागी बनने की आशंका है. कुमार विश्वास ने अभी तो इशारों-इशारों में अपनी नाराज़गी जाहिर करनी शुरू की है. सुनी-सुनाई है कि वे इससे ज्यादा खुलकर बोलने के लिए वे दिल्ली नगर निगम के चुनावी नतीजों का इंतजार कर रहे हैं.

अप्रैल के आखिरी हफ्ते में दिल्ली नगर निगम चुनाव का फैसला भी हो जाएगा. इसके बाद आम आदमी पार्टी में कुछ खास लोगों के खिलाफ आवाज़ उठ सकती है. कुमार विश्वास ने सोशल मीडिया पर जो शायरी लिखी वह आने वाले वक्त के बारे में बहुत कुछ कहती है, खासकर अब्बास ताबिश की वे लाइनें – ‘पानी आंख में भर कर लाया जा सकता है, अब भी जलता शहर बचाया जा सकता है.’ कुमार के विद्रोही स्वर सुनने के बाद जब कुछ पत्रकारों ने उनसे संपर्क किया तो उन्होंने सभी को दिल्ली नगर निगम के नतीजे तक इंतजार करने को कहा है.

ज्यादातर ओपिनियन पोल की भविष्यवाणी है कि नगर निगम के चुनाव में भी आम आदमी पार्टी की हार तय है. अगर ऐसा हुआ तो अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी को ऐसी और बातों को और भी खुलकर सुनने के लिए खुद को तैयार करना पड़ेगा. क्योंकि सिर्फ अरविंद केजरीवाल ही कुमार विश्वास से नाराज़ नहीं हैं. राजौरी गार्डेन से विधायक रहे जरनैल सिंह की बातें भी केजरीवाल को पसंद नहीं आई होगी. राजौरी गार्डेन में आम आदमी पार्टी की हार के बाद जरनैल सिंह पार्टी के इकलौते नेता थे जिन्होंने पार्टी लाइन से हटकर खूब बातें की. उन्होंने साफ कहा कि अब आत्मचिंतन का वक्त आ गया है. उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि ‘कांग्रेस की तरह ऐसा नहीं हो सकता कि पार्टी जीते तो राहुल गांधी जिम्मेदार हैं और हारे तो महात्मा गांधी.’

पार्टी से जुड़े एक नेता बताते हैं कि जरनैल का नाराज़ होना भी जायज ही है. दो साल पहले वे दस हजार से ज्यादा वोट से चुनाव जीते थे, फिर उनसे इस्तीफा दिलवाकर केजरीवाल ने उन्हें प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए पंजाब भेज दिया. जब वे लंबी में चुनाव हारे तो राजौरी गार्डेन से वापस उन्हें टिकट नहीं दिया गया.

पार्टी पर नज़र रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं कि दिल्ली के नगर निगम चुनाव की कमान भी आम आदमी पार्टी के उन्हीं नेताओं के हाथ में है जिनके हाथों में पंजाब औरगोवा की थी. ये केजरीवाल के बेहद खास लोग हैं.केजरीवाल सरकार चला रहे हैं और ये नेता पार्टी चला रहे हैं. लेकिन पंजाब और गोवा में चुनाव हारने के बाद भी इन नेताओं की सेहत और रसूख पर असर नहीं पड़ा है. अगर दिल्ली नगर निगम चुनाव में हार की हैट्रिक पूरी हो जाती है तो अब तक हाशिए पर बैठे नेता चुप नहीं बैठेंगे. भाजपा और कांग्रेस उसी दिन का इंतजार कर रहे हैं जब आप के घर में आग लगेगी औरउसे लगाने वाला भी कोई अपना ही होगा.