भारत से फरार उद्योगपति विजय माल्या को स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक उनकी गिरफ्तारी प्रत्यर्पण वारंट के तहत की गई है. हालांकि, लंदन की वेस्टमिनिस्टर मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने तीन घंटे के भीतर ही उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया.

इकॉनॉमिक टाइम्स के मुताबिक विजय माल्या की इस गिरफ्तारी को भारत के प्रत्यर्पण निवेदन पर पहली कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है. भारत के विदेश मंत्रालय ने आठ फरवरी को प्रत्यर्पण संधि के तहत जालसाजी के आरोपित विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन से औपचारिक निवेदन किया था. इसके बाद ब्रिटेन की सरकार ने भारत के अनुरोध को सत्यापित करके अगली कार्रवाई के लिए जिला जज के पास भेज दिया था.

ब्रिटेन में किसी व्यक्ति को प्रत्यर्पित करने की प्रक्रिया में कई चरण हैं. इसमें सबसे पहले जज गिरफ्तारी वारंट जारी करने या न करने के बारे में फैसला करता है. गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद संबंधित व्यक्ति को प्राथमिक सुनवाई के लिए अदालत में पेश किया जाता है. इसके बाद प्रत्यर्पण के बारे में विदेश मंत्री द्वारा अंतिम फैसला लेने से पहले एक प्रत्यर्पण सुनवाई भी होती है.

मार्च 2016 से ब्रिटेन में रह रहे विजय माल्या के खिलाफ भारत में कई मामले चल रहे हैं. इनमें सबसे बड़ा मामला 17 भारतीय बैंकों का 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज न चुकाने का है. माल्या ने इन सभी मामलों में समन जारी होने के बावजूद भारत लौटने से इंकार कर दिया था. इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट कोर्ट ने नवंबर 2016 में उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया था. इसके अलावा 31 जनवरी 2017 को सीबीआई की विशेष अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था.