दिल्ली नगर निगम चुनाव के ठीक पांच दिन पहले प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अरविंदर सिंह लवली मंगलवार को भाजपा में शामिल हो गए. लवली ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की उपस्थिति में पार्टी का दामन थामा. जानकारों के अनुसार एमसीडी चुनाव के टिकट बंटवारे में दिल्ली कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष अजय माकन द्वारा नजरअंदाज किए जाने से वे नाराज थे. लवली के कांग्रेस छोड़ने पर पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि इस तरह पार्टी छोड़ना गद्दारी है.

अरविंदर सिंह लवली शीला दीक्षित सरकार में शिक्षा, पर्यटन और गुरुद्वारा प्रशासन मामलों के मंत्री रह चुके हैं. 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के समय प्रदेश अध्यक्ष रहे लवली ने पार्टी को एक भी सीट न मिल पाने की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा ​दे दिया था. इसके बाद अजय माकन दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए थे.

जानकारों के अनुसार इस बार के एमसीडी चुनाव के टिकट बंटवारे में माकन ने वरिष्ठ नेताओं से कोई राय नहीं ली. इसे लेकर अरविंदर सिंह लवली सहित पार्टी के कई नेताओं में नाराजगी है. मान-मनौवल की कोशिशें भी की गईं पर लवली की नाराजगी दूर न हो सकी. आखिरकार लवली ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने का निर्णय ले लिया. भाजपा की सदस्यता लेते वक्त उनके साथ दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी और केंद्रीय मंत्री विजय गोयल भी मौजूद थे.

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के करीबी माने जाने वाले लवली के पार्टी छोड़ देने पर शीला दीक्षित ने कहा कि उनका इस तरह पार्टी छोड़ जाना गद्दारी है. उन्होंने कहा कि अब समझ में नहीं आता कि किस नेता पर भरोसा किया जाए. उनका कहना था, ‘कांग्रेस ने लवली को बहुत कुछ दिया पर समस्या होने पर पार्टी ही छोड़ देना गलत है.’ शीला दीक्षित ने अजय माकन के मनमाने रवैए की भी आलोचना की और कहा कि वे लोगों की नहीं सुन रहे. उन्होंने माना कि दिल्ली कांग्रेस में अभी सुधार की आवश्यकता है.

लवली के भाजपा में शामिल होने पर पार्टी प्रवक्ता विजय सोनकर का कहना है कि भाजपा की नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम से प्रभावित होकर कांग्रेस के कई बड़े नेता पार्टी में आ रहे हैं, जिनका स्वागत किया जाना चाहिए.