अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम को सीमित करने और नौकरियों में अमेरिकियों को प्राथमिकता दिलाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक मंगलवार को विस्कॉन्सिन राज्य के कनोशा में ‘बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन’ नीति के तहत उन्होंने एच-1बी वीजा कार्यक्रम की समीक्षा करने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए. अमेरिका में रोजगार के लिए प्रवासी पेशेवरों द्वारा इस्तेमाल किए जाने एच-1बी वीजा की समीक्षा का मकसद इसे उच्च कौशल वाले कर्मचारियों तक सीमित करना है.

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘इसके जरिए हम पूरी दुनिया को बता रहे हैं कि हम अपने श्रमिकों, अपनी नौकरियों को बचाने और अमेरिका को प्राथमिकता देने जा रहे हैं.’ हालांकि, डेमोक्रेट्स का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप का यह आदेश पर्याप्त सख्त नहीं है और इस साल हजारों एच-1बी वीजा जारी होने के काफी देरी से आया है.

अमेरिका के एच-1बी वीजा कार्यक्रम में अगर कोई बदलाव होता है तो इससे भारतीय सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि इसका इस्तेमाल करने वालों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है. अमेरिका हर साल 85 हजार एच-1बी वीजा जारी करता है, जिनमें से आधे से ज्यादा भारतीयों के हिस्से में आते हैं. लेकिन, ट्रंप के सहयोगियों का कहना है कि इस आदेश से एच-1बी वीजा संबंधी मौजूदा नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा. उनके मुताबिक इसका मकसद एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिकियों की नौकरियों की लूट को खत्म करना और इसकी जगह पर योग्यता आधारित व्यवस्था को लाना है.

एच-1बी वीजा से जुड़ी तमाम आशंकाओं के बीच बीते चार साल में पहली बार इसके आवेदनों में अप्रत्याशित कमी आई है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक सोमवार को यूएस सिटीजनशिप और इमीग्रेशन सर्विसेज ने कहा है कि 2017 में कुल 1,99,000 आवेदन आए जो 2016 की तुलना में 37,000 कम हैं.