हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह गुरुवार को नई दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश हुए. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार ईडी ने आय से अधिक मामले में छापेमारी के दौरान जब्त दस्तावेजों के बारे में बयान दर्ज कराने के लिए उन्हें समन जारी कर 13 अप्रैल को पेश होने के लिए कहा था. लेकिन, आधिकारिक व्यस्तता हवाला देकर उन्होंने पेश होने में असमर्थता जताई थी. इसके बाद ईडी ने नया समन जारी कर 20 अप्रैल को पेश होने के लिए कहा था. ईडी ने वीरभद्र सिंह और उनके परिजनों के खिलाफ 2015 में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया था. ईडी इससे पहले उनकी पत्नी और बेटे से पूछताछ कर चुकी है.

इस बीच वीरभद्र सिंह ने अपने खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले को खत्म करने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिल पाई थी. रिपोर्ट के मुताबिक उनकी याचिका सुनवाई के दौरान बुधवार को ईडी ने दिल्ली हाईकोर्ट में यह आश्वासन देने से इनकार कर दिया था कि जब वे पूछताछ के लिए पेश होंगे, उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा.

अप्रैल के पहले हफ्ते में ईडी ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए वीरभद्र सिंह का दिल्ली स्थित एक फार्महाउस को जब्त कर लिया था. इसकी कीमत 27.29 करोड़ रुपए है. ईडी ने इसमें अज्ञात स्रोत से अर्जित पैसे का निवेश माना है. हालांकि, दिल्ली का फार्महाउस जब्त होने के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने केंद्र सरकार पर राजनीतिक वजहों से परेशान करने और राज्य सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया था. केंद्र सरकार पर ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उन्होंने यह भी कहा था कि वे किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं.