पनामा पेपर्स लीक मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के लिए वहां की शीर्ष अदालत का फैसला फौरी राहत लेकर आया है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने 3-2 के विभाजित मत के जरिए इस मामले पर फैसला सुनाया है. कोर्ट ने नवाज शरीफ और उनके तीन बच्चों (मारिया, हसन और हुसैन नवाज) पर लगे आरोपों की संयुक्त जांच दल (जेआईटी) से दोबारा जांच कराने का आदेश दिया है. इसके साथ ही अदालत ने जेआईटी से 60 दिन के भीतर जांच पूरी करने और रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है.

प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके तीन बच्चों पर विदेशी खातों के जरिए अपनी बेनामी आय को टैक्स हेवन में छिपाने का आरोप है. यह मामला कानूनी फर्म मोसैक फोन्सेका के दस्तावेज लीक होने के बाद सामने आया था, जो बेनामी आय को छिपाने के लिए फर्जी कंपनियां स्थापित करने में लोगों की मदद करती थी. सुप्रीम कोर्ट में चार जनवरी से इस मामले की सुनवाई चल रही थी.

नवाज शरीफ के समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा, ‘आज के आदेश से साफ हो गया कि सुप्रीम कोर्ट में विरोधियों द्वारा पेश किए गए सबूत पर्याप्त नहीं थे.’

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर इस्लामाबाद में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया था. माना जा रहा था कि अगर नवाज शरीफ के खिलाफ फैसला आता है तो न केवल उन्हें पद छोड़ना पड़ेगा, बल्कि देश में मध्यावधि चुनाव भी कराना पड़ेगा.