इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से आलोचनाओं का सामना कर रहे चुनाव आयोग के लिए राहत भरी खबर है. इस साल जुलाई तक आयोग को 30,000 नई वोटर वेरीफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) मशीनें मिलने जा रही हैं. इनका इस्तेमाल इस साल के आखिर तक गुजरात और हिमाचल प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में किया जाएगा.

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा है, ‘अभी हमारे पास 53,500 वीवीपीएटी मशीनें हैं. अगले तीन महीनों में हमें 30,000 मशीनें और मिल जाएंगी. करीब 84,000 मशीनें गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव के लिए पर्याप्त होंगी.’

देश में ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों का निर्माण इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड करती हैं. वीवीपीएटी एक तरह का प्रिंटर होता है, जिसे ईवीएम से जोड़ा जाता है. इससे मतदान के बाद संबंधित पार्टी के चुनाव चिह्न की एक पर्ची निकलती है, जिसे देखकर मतदाता यह जान सकता है कि उसने जिसे वोट दिया है, वोट उसे मिला है या नहीं. मतदाता को पर्जी को देखने के लिए सात सेकेंड का समय मिलता है, इसके बाद यह पर्ची एक डिब्बे में जमा हो जाती है. इसे मतगणना से जुड़े विवादों को सुलझाने में इस्तेमाल किया जा सकता है.