सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को राहत देते हुए उनके खिलाफ आंध्र प्रदेश में चल रहे आपराधिक मामले को भी खारिज कर दिया है. उनके खिलाफ आंध्र प्रदेश में अनंतपुर जिले में धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का मामला चल रहा था. धोनी को अप्रैल 2013 में बिजनेस टुडे के कवर पेज पर भगवान विष्णु के रूप में दिखाया गया था. इसमें उनके हाथों में वे सारे उत्पाद थे जिनका वे विज्ञापन करते हैं. इसी को लेकर उनके खिलाफ कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में मामले दर्ज हुए थे.

सुप्रीम कोर्ट ने महेंद्र सिंह धोनी के साथ-साथ उन्हें विष्णु के रूप में प्रकाशित करने वाली पत्रिका के संपादक के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को भी खारिज कर दिया. जस्टिस दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और एमएम शांतनगौदार की बेंच ने कहा कि इन लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा-295ए (धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना) के तहत मामला नहीं बनता है, क्योंकि उन्होंने जानबूझकर शिकायतकर्ता की भावना को ठेस पहुंचाने की कोशिश नहीं की थी. अदालत ने यह भी कहा कि अगर क्रिकेटर और संपादक को इस मामले में सजा मिलती है तो यह न्याय का उपहास होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल पांच सितंबर को धोनी और अन्य के खिलाफ कर्नाटक में चल रहे मामले को खारिज कर दिया था. इसके अलावा शीर्ष अदालत ने धोनी को राहत देने से इनकार करने वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर भी रोक लगा दी थी.

कर्नाटक के सामाजिक कार्यकर्ता जयकुमार हीरामथ धोनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने कहा था कि धोनी को भगवान विष्णु के रूप में अलग-अलग उत्पादों के साथ दिखाया गया है, जिसमें जूता भी शामिल है जो भगवान का अपमान है. इसका संज्ञान लेते हुए बेंगलुरू के अतिरिक्त मेटोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का मामला दर्ज करने और धोनी को हाजिर होने का आदेश दिया था. धोनी ने इसे कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. उनका कहना था कि चूंकि उन्होंने मैग्जीन में छपी फोटो के रूप में न तो कोई विज्ञापन किया है और न ही उसके बदले कोई भुगतान लिया है, इसलिए वे जिम्मेदार नहीं हैं. लेकिन, कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस दलील को नहीं माना था. इससे बाद वे सुप्रीम कोर्ट आ गए थे.