सीरिया, उत्तर कोरिया, अफगानिस्तान के बाद अब ईरान पर भी अमेरिका का रुख कड़ा हो गया है. अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने ईरान से 2015 में हुए परमाणु समझौते को विफल करार देते हुए कहा है कि यदि ईरान पर अंकुश नहीं लगाया गया तो वह दूसरा उत्तर कोरिया बन सकता है. यही नहीं, उन्होंने आशंका जताई कि अनियंत्रित ईरान पूरी दुनिया को भी अपनी राह ले जा सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान परमाणु समझौते की शर्तों का पालन कर रहा है. उन्होंने इस समझौते को रद्द करने का कोई संकेत नहीं दिया.

टिलरसन का यह बयान ट्रंप प्रशासन के कांग्रेस को यह बताने के बाद आया है कि ईरान परमाणु समझौते का पालन कर रहा है. सरकार ने कहा कि इस समझौते ने परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण लगाने के बदले में ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे दी. उसने परमाणु समझौते को विफल करार देते हुए बताया कि इसने सिर्फ ईरान को परमाणु संपन्न बनने की गति थोड़ी धीमी कर दी.

उत्तर कोरिया का उदाहरण देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, ‘हम अभी उत्तर कोरिया से जैसे परमाणु खतरे का सामना कर रहे हैं, वही खतरा ईरान से भी हो सकता है.’ टिलरसन ने कहा कि ईरान की परमाणु महत्वकांक्षा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है. उन्होंने ईरान पर पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ाने का आरोप लगाया. टिलरसन ने कहा कि ईरान ने यमन, इराक और सीरिया में अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले काम किए हैं. उनके मुताबिक ईरान की कार्रवाई अमेरिका, पश्चिम एशिया और पूरी दुनिया के लिए खतरा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के समय डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार कहा था कि वे राष्ट्रपति बनने के बाद ईरान के साथ बराक ओबामा प्रशासन द्वारा किए गए परमाणु समझौते को रद्द कर देंगे. ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद इस समझौते की समीक्षा के आदेश भी दे दिए. फिलहाल इसकी समीक्षा चल रही है. हालांकि ईरान कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पुरी तरह से नागरिक जरूरतों के लिए है. ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्लाह खामेनेई ने नवंबर में अमेरिका को चेताया था कि यदि उसने परमाणु समझौते का उल्लंघन किया तो ईरान चुप नहीं रहेगा, वह भी पलटवार करेगा.