सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चारा घोटाला मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. उसने एक हफ्ते के भीतर सभी पक्षों से अपने सुझाव देने को कहा है. शीर्ष अदालत ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और सीबीआई की याचिकाओं की सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है. चारा घोटाला 1990 से लेकर 1997 के बीच बिहार के पशुपालन विभाग में अलग-अलग जिलों में लगभग 1,000 करोड़ रुपये के गबन से जुड़ा है. इस दौरान लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे.

शीर्ष अदालत ने इस हफ्ते की शुरुआत में लालू प्रसाद यादव की याचिका पर सुनवाई की थी, जिसमें उन्होंने चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में अपनी जेल की सजा को चुनौती दी थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई की थी जिसमें लालू प्रसाद यादव और अन्य के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट द्वारा चाईबासा चारा घोटाले से जुड़ी एक एफआईआर को खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी.

सीबीआई ने अपनी हालिया अपील में हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें लालू प्रसाद यादव के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में केवल दो धाराओं के तहत सुनवाई को मंजूरी दी गई थी, जबकि अन्य आरोपों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि एक अपराध के लिए किसी व्यक्ति का दो बार ट्रायल नहीं हो सकता. झारखंड हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि भारतीय दंड संहिता की धारा-201(अपराध के साक्ष्य मिटाना और गलत सूचना देना ) और धारा-511 (ऐसा अपराध करने की कोशिश करना, जिसमें आजीवन कारावास या कारावास की सजा सकती है ) के तहत लालू प्रसाद यादव के खिलाफ मामले की सुनवाई चलती रहेगी. यह आरोप लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए 96 लाख रुपयों की गलत निकासी के एक मामले से जुड़ा है.